सुप्रीम कोर्ट से बड़ा फैसला, अब हाई कोर्ट का दरवाजा खुला
नई दिल्ली/पटना। बिहार के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने स्वतंत्र सीबीआई जांच के निर्देश देने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित हाई कोर्ट का रुख करने की सलाह दी है। इस फैसले के बाद अब मामले की अगली कानूनी लड़ाई हाई कोर्ट में लड़ी जाएगी।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच में जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू ने मामले की सुनवाई की।
याचिका में पूरे एनकाउंटर की स्वतंत्र CBI जांच, दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई और जांच की निगरानी किसी स्वतंत्र एजेंसी अथवा सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति से कराने की मांग की गई थी।
हालांकि अदालत ने कहा कि इस स्तर पर सीधे हस्तक्षेप उचित नहीं है और याचिकाकर्ता पहले हाई कोर्ट में उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल करें।
किसने दाखिल की थी याचिका?
यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर की गई थी।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र एजेंसी की जांच आवश्यक है।
क्या है पूरा मामला?
मामला 17 जून को बिहार के भोजपुर जिले में हुए पुलिस एनकाउंटर से जुड़ा है, जिसमें भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई थी।
पुलिस के अनुसार, शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौती गांव में गिरफ्तारी के दौरान भरत भूषण तिवारी ने कथित रूप से अवैध हथियार से पुलिस टीम पर फायरिंग की थी।
पुलिस का दावा है कि आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें वह घायल हुआ और बाद में उसकी मृत्यु हो गई।
परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
मृतक के परिजनों ने पुलिस के दावों को पूरी तरह खारिज किया है।
परिवार का कहना है कि भरत भूषण तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था और वह निहत्था था। परिजनों ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया।
पहले ही हो चुकी है न्यायिक जांच की घोषणा
घटना के बाद बिहार में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक विवाद देखने को मिला।
विवाद बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। साथ ही मृतक के परिवार के खिलाफ दर्ज कुछ मामलों को बाद में वापस ले लिया गया।
पुलिस अधिकारियों पर भी दर्ज हुई FIR
मृतक के परिजनों की शिकायत पर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है।
एफआईआर में तत्कालीन एसडीपीओ राजेश शर्मा, शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार सहित कई पुलिस अधिकारियों के नाम शामिल हैं।
गांव में श्रद्धांजलि सभा की तैयारी
इधर भरत भूषण तिवारी के गांव में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जा रही है।
आयोजन समिति का दावा है कि बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल होंगे। समिति का कहना है कि गांव में भरत भूषण तिवारी को “शहीद” के रूप में सम्मान दिया जा रहा है।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब याचिकाकर्ता संबंधित हाई कोर्ट में नई याचिका दाखिल कर सकते हैं। आने वाले दिनों में हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई इस बहुचर्चित मामले की कानूनी दिशा तय करेगी।
प्रमुख बिंदु
- सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच की मांग वाली याचिका खारिज की
- याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की सलाह
- 17 जून को भोजपुर में एनकाउंटर में हुई थी भरत भूषण तिवारी की मौत
- पुलिस और परिवार के दावों में बड़ा विरोधाभास
- राज्य सरकार पहले ही न्यायिक जांच के आदेश दे चुकी है
- कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
- अब मामले की अगली सुनवाई हाई कोर्ट में होने की संभावना
निष्कर्ष
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब कानूनी रूप से नए चरण में प्रवेश कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच का रास्ता फिलहाल बंद करते हुए हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है। ऐसे में अब सभी की नजरें हाई कोर्ट की कार्यवाही, न्यायिक जांच की प्रगति और पुलिस जांच के निष्कर्षों पर टिकी रहेंगी।










