अयोध्या-नागपुर | डिजिटल डेस्क
1 जुलाई 2026 — अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक मोड़ आ गया है। इस महा-घोटाले की गूंज अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय नागपुर तक पहुंच चुकी है। संघ प्रमुख मोहन भागवत के निर्देश पर तैयार की गई एक बेहद गोपनीय और विस्तृत रिपोर्ट उन्हें सौंप दी गई है, जिसके बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े पैमाने पर ‘ऑपरेशन क्लीन’ (फेरबदल) की तैयारी शुरू हो गई है।
यह रिपोर्ट किसी और ने नहीं, बल्कि आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार ने तैयार की है। संघ प्रमुख के आदेश पर उन्होंने अयोध्या में तीन दिनों तक गुप्त प्रवास किया और इस पूरे मामले के हर एक पहलू की बारीक जांच की।
3 दिन का गुप्त प्रवास और RSS प्रमुख को भेजी गई सीक्रेट रिपोर्ट
सूत्रों के मुताबिक, रामलला के चढ़ावे में हुई इस धांधली से संघ का शीर्ष नेतृत्व बेहद नाराज और गंभीर है। क्योंकि यह सिर्फ पैसों की हेराफेरी नहीं, बल्कि दुनिया भर के सनातनी हिंदुओं की आस्था और साख से जुड़ा मामला है।
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ग्राउंड जीरो पर जांच: क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार ने अयोध्या प्रवास के दौरान ट्रस्ट के कर्मचारियों, सुरक्षा अधिकारियों और स्थानीय संतों से अलग-अलग मुलाकात कर फीडबैक लिया।
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रिपोर्ट में क्या है? इस गोपनीय रिपोर्ट में मंदिर के भीतर सुरक्षा और फाइनेंशियल मैनेजमेंट (वित्तीय प्रबंधन) की गंभीर कमियों को रेखांकित किया गया है। साथ ही उन लूपहोल्स (कमियों) का भी जिक्र है जिनका फायदा उठाकर आरोपियों ने इस वारदात को अंजाम दिया।
ट्रस्ट में ‘महा-फेरबदल’ की रूपरेखा: जिम्मेदारियां बदलेंगी, नए चेहरे आएंगे
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब ट्रस्ट को पूरी तरह से री-स्ट्रक्चर (पुनर्गठित) करने की तैयारी है। संघ प्रमुख को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर आगामी दिनों में ये बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं:
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नए संतों की एंट्री: ट्रस्ट की साख को दोबारा बहाल करने के लिए देश के कुछ बेहद सम्मानित और निष्पक्ष संतों को ट्रस्ट में नई जगह दी जा सकती है।
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जिम्मेदारियों का बंटवारा: अब किसी एक या दो व्यक्तियों के हाथ में पूरा पावर सेंट्रलाइजेशन (शक्तियों का केंद्रीकरण) नहीं रहेगा। वित्तीय मामलों, मंदिर प्रबंधन और वीआईपी प्रोटोकॉल के लिए अलग-अलग कमेटियां बनेंगी।
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डिजिटल और पारदर्शी सिस्टम: कैश काउंटर की पूरी व्यवस्था को हटाकर अब 100% डिजिटल मॉनिटरिंग और कड़े सुरक्षा ऑडिट की व्यवस्था लागू की जाएगी।
राम मंदिर ट्रस्ट का नया प्रस्तावित ढांचा
| प्रशासनिक पक्ष | मौजूदा स्थिति / बदलाव के संकेत |
| जांच का स्तर | संघ प्रमुख मोहन भागवत के पास पहुंची सीक्रेट रिपोर्ट। |
| प्रबंधन में बदलाव | चंपत राय और अनिल मिश्रा के बाद नए चेहरों की तलाश तेज। |
| नए चेहरे | अयोध्या और देश के प्रतिष्ठित संतों को ट्रस्ट में शामिल करने पर मंथन। |
| सिस्टम अपग्रेड | चढ़ावे के पाई-पाई के हिसाब के लिए ‘थर्ड पार्टी फोरेंसिक ऑडिट’ की तैयारी। |
संघ के दखल से बैकफुट पर आए ‘सफेदपोश’
इस मामले में आरएसएस (RSS) के सीधे हस्तक्षेप के बाद अयोध्या से लेकर लखनऊ तक प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर न केवल ट्रस्ट के भीतर सफाई होगी, बल्कि पर्दे के पीछे छिपे उन बड़े सफेदपोशों पर भी शिकंजा कसेगा जो इस घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड रहे हैं।










