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लेहड़ा देवी धाम का भव्य कायाकल्प: 45 करोड़ से बनेगा आधुनिक धार्मिक–पर्यटन केंद्र

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज, जिले के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध शक्तिपीठ लेहड़ा देवी धाम का पुनर्विकास कर उसे आधुनिक धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। लगभग 45 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से प्रस्तावित परियोजना में मंदिर परिसर का कायाकल्प, अर्धचंद्राकार कॉरिडोर निर्माण, और श्रद्धालुओं के लिए विश्वस्तरीय सुविधाओं का निर्माण शामिल है।
प्रस्तावित योजनाओं के तहत मंदिर परिसर को अर्धचंद्राकार कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा। मुख्य प्रवेश द्वार को भव्य स्वरूप दिया जाएगा तथा परिसर में प्रसाद कक्ष, सुरक्षा एवं सीसीटीवी कंट्रोल रूम, श्रद्धालु विश्राम गृह, फर्स्ट एड सेंटर और जूता-चप्पल गृह जैसे आवश्यक यूटिलिटी कक्ष बनाए जाएंगे। पूरे परिसर में नक्काशीदार पत्थरों का उपयोग होगा और मंदिर की चारदीवारी पर देवी-देवताओं की प्रतिमाओं एवं धार्मिक-आध्यात्मिक नक्काशियों से स्थान की भव्यता बढ़ाई जाएगी।
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक पार्किंग व्यवस्था का निर्माण किया जाएगा और मंदिर के आसपास के दुकानदारों को व्यवस्थित कर सुव्यवस्थित धार्मिक बाजार विकसित किया जाएगा। पुराने घाटों का सुंदरिकरण तथा नए घाटों का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से कराया जाएगा। परिधीय जलाशय एवं सरोवर की सफाई के लिए अत्याधुनिक नैनो बबल तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे जलाशय शुद्ध और पर्यावरण के अनुकूल बने रहेंगे।
रात्रिकालीन आकर्षण के रूप में पूरे परिसर में लाइट एंड साउंड शो तथा फसाड लाइटिंग से भव्य रोशनाई की योजना है। परियोजना में आधुनिक हवनकुंड एवं यज्ञशाला का निर्माण भी प्रस्तावित है। साथ ही पारंपरिक कड़ाही प्रथा के लिए अलग समर्पित क्षेत्र विकसित किया जाएगा, ताकि धार्मिक अनुष्ठान सुविधा एवं संगठन के साथ संपन्न हो सकें। ये इंतजाम न केवल भक्तों के धार्मिक अनुभव को समृद्ध करेंगे, बल्कि तीर्थाटन में वृद्धि से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव भी पड़ेगा।
ऐतिहासिक पहचान और पौराणिक महत्व
लेहड़ा देवी धाम महराजगंज मुख्यालय से लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार यह स्थान प्राचीन काल में आर्द्रवन नामक घने जंगल के बीच पवह नदी (वर्तमान में नाला) के तट पर बसे मंदिर के रूप में विख्यात था। इसका प्राचीन नाम अदरौना देवी स्थान बताया जाता है, जो कालान्तर में लेहड़ा देवी धाम के रूप में प्रसिद्ध हुआ। मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास का अधिकांश समय इसी आर्द्रवन में व्यतीत किया था, जिससे स्थान का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व और बढ़ जाता है।
प्रभाव और आगे की प्रक्रिया
पुनर्विकास परियोजना के पूरा होने पर लेहड़ा देवी धाम न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्क‍ि पर्यटन व सांस्कृतिक गतिविधियों का केन्द्र भी बनेगा। इससे स्थानीय व्यापार, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्र को नई गति मिलने की संभावना है। अधिकारीयों ने बताया है कि परियोजना का विस्तृत तकनीकी और वित्तीय स्वरूप जल्द सार्वजनिक किया जाएगा तथा आवश्यक सैन्दर्भिक अनुमोदन और निविदा प्रक्रिया के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा।
स्थानीय पुरातत्व एवं सांस्कृतिक संरक्षण विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया है कि विकास कार्यों में साइट की ऐतिहासिकता और पौराणिक मान्यताओं का सम्मान कर संरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य होगा, ताकि धरोहर का मूल स्वरूप भी सुरक्षित रखा जा सके।

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