अयोध्या: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। 9 पन्नों की इस शुरुआती रिपोर्ट में सुरक्षा में गंभीर चूक से लेकर नियमों की अनदेखी तक कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस मामले में अब तक 8 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। वहीं, इस विवाद के बीच राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हालिया बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे भी स्वीकार कर लिए गए हैं।
9 पन्नों की SIT रिपोर्ट: नियमों की उड़ी धज्जियां
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर के चढ़ावे (दान) की गिनती के दौरान सुरक्षा मानकों और तय एसओपी (SOP) का बिल्कुल भी पालन नहीं किया गया। बैंक और ट्रस्ट के बीच जो सुरक्षा प्रोटोकॉल तय थे, उन्हें लागू करने में भारी लापरवाही बरती गई।
रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि गणना कक्ष (कंटिंग रूम) में मौजूद पर्यवेक्षक और जिम्मेदार अधिकारी वहां हो रही संदिग्ध गतिविधियों को भांपने और समय रहते कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रहे।
SIT की सिफारिश: “सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और SOP लागू कराने की जिम्मेदारी निभाने में अधिकारियों की तरफ से गंभीर चूक हुई है। जांच टीम ने संबंधित कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ चोरी, आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust), आपराधिक साजिश और लापरवाही जैसी गंभीर धाराओं में कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है।”
CCTV फुटेज का खुलासा: कपड़ों और जूतों में छिपाए नोट
जांच के दौरान टीम ने 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया। इस दौरान जो तस्वीरें सामने आईं, वो बेहद चौंकाने वाली थीं:
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70 संदिग्ध घटनाएं: फुटेज में करीब 70 ऐसी घटनाएं देखी गईं जहां सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हो रहा था।
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चोरी का तरीका: कुछ गणनाकर्मी दान में आए नोटों की गड्डियां और नकदी को अपने कपड़ों, जेबों और यहां तक कि अपने जूतों में छिपाते हुए साफ दिखाई दिए।
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लगातार हो रही थी चोरी: SIT के मुताबिक, यह किसी एक दिन की घटना नहीं थी, बल्कि इसे एक सोचे-समझे ढर्रे (लगातार दोहराए जाने वाले तरीके) के तहत अंजाम दिया जा रहा था।
फिलहाल 6 गणनाकर्मियों को प्रथम दृष्टया इस चोरी और गबन में सीधे तौर पर शामिल माना गया है। जांच में इनके बैंक खातों में आय से अधिक नकदी जमा होने और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के सबूत मिले हैं, जिसकी विस्तृत पड़ताल की जा रही है।
सिफारिश पर हुई नियुक्तियां, न तलाशी न ड्रेस कोड
SIT ने अपनी रिपोर्ट में सिर्फ चोरी ही नहीं, बल्कि ट्रस्ट के भीतर की व्यवस्था और नियुक्तियों पर भी कड़े सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट में सामने आया कि:
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एक गणनाकर्मी की नियुक्ति बिना किसी कड़े बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के, सिर्फ सिफारिश के आधार पर कर दी गई थी।
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गणना कक्ष में आने और बाहर जाने के समय कर्मचारियों की कोई शारीरिक तलाशी (Frisking) नहीं ली जाती थी।
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कर्मचारियों के लिए तय ड्रेस कोड का पालन नहीं कराया जाता था, जिससे उन्हें नोट छिपाने का मौका मिला।
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रूम के अंदर निजी सामान (जैसे बैग या मोबाइल) ले जाने पर लगी रोक को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया था और सीसीटीवी निगरानी का भी पर्याप्त उपयोग नहीं हो रहा था।
अभी अंतिम रिपोर्ट आना बाकी
SIT ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक शुरुआती (प्रारंभिक) जांच रिपोर्ट है। आरोपियों के बैंक खातों की विस्तृत पड़ताल, फोरेंसिक जांच (Forensic Investigation) और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को जुटाने के बाद एक मुकम्मल अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके बाद कुछ और बड़े चेहरों पर गाज गिर सकती है।
Quick Facts: राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड (SIT रिपोर्ट के मुख्य बिंदु)
| मुख्य बिंदु | जांच रिपोर्ट के मुख्य तथ्य |
| कुल जेल गए आरोपी | अब तक 8 लोगों को भेजा गया जेल |
| ट्रस्ट में बड़ा बदलाव | चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार |
| SIT रिपोर्ट का आकार | 9 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट |
| CCTV फुटेज की अवधि | 27 अप्रैल से 5 जून 2026 तक की जांच |
| संदेह के घेरे में घटनाएं | करीब 70 संदिग्ध वारदातें आईं सामने |
| चोरी का हथकंडा | कपड़ों, जेबों और जूतों में नोटों की गड्डियां छिपाई गईं |
| सुरक्षा में खामियां | नो फ्रिस्किंग (तलाशी नहीं), ड्रेस कोड का अभाव, सिफारिशी नियुक्तियां |










