अयोध्या: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से सोमवार को एक बहुत बड़ी खबर सामने आई। ट्रस्ट की अहम बैठक में एक बड़े प्रशासनिक पुनर्गठन (Administrative Restructuring) को मंजूरी दी गई है। पिछले कुछ दिनों से चर्चा में रहे महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने इस फैसले की पुष्टि की है।
इस बड़े बदलाव के बाद अब चंपत राय और अनिल मिश्रा के कामकाज और प्रशासनिक संचालन की पूरी जिम्मेदारी कृष्ण मोहन को सौंपी गई है। इस खबर के बाद हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर कृष्ण मोहन कौन हैं, जिन्हें इतने बड़े ट्रस्ट की कमान सौंपी गई है।
कौन हैं कृष्ण मोहन? (Who is Krishna Mohan)
कृष्ण मोहन एक बेहद अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं और उनकी संगठनात्मक पकड़ बहुत मजबूत मानी जाती है। उनका सफर शिक्षा से लेकर देश की शीर्ष सेवा और फिर सामाजिक जीवन तक फैला हुआ है:
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शुरुआती शिक्षा और करियर: कृष्ण मोहन ने साल 1970 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से जियोलॉजी (भूविज्ञान) में एमएससी (M.Sc.) की डिग्री हासिल की थी।
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भारतीय वन सेवा (IFS) में चयन: इसके बाद वे भारतीय वन सेवा (IFS) के लिए चुने गए। उन्हें महाराष्ट्र कैडर मिला, जहां उन्होंने वन विभाग में कई दशकों तक अपनी सेवाएं दीं।
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महत्वपूर्ण पद: अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) और कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (Conservator of Forests) जैसे बेहद जिम्मेदार और रसूखदार पदों को संभाला।
रिटायरमेंट के बाद RSS से जुड़ाव
साल 2012 में सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद कृष्ण मोहन अपने गृह जनपद हरदोई लौट आए। प्रशासनिक अनुभव के धनी कृष्ण मोहन घर बैठने के बजाय सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय हो गए। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की सदस्यता के साथ काम शुरू किया और अवध क्षेत्र में संघ के विभिन्न पदों पर रहते हुए बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं।
चंदा चोरी मामले में निभाई थी अहम भूमिका:
कृष्ण मोहन का नाम पहली बार तब सबसे ज्यादा चर्चा में आया था, जब राम मंदिर चंदा चोरी (दान गबन) से जुड़े एक बड़े मामले में उनकी शिकायत पर ही एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी। उनकी इस सक्रियता के बाद ही जांच एजेंसियों ने एक्शन लिया था और कई लोगों पर गाज गिरी थी।
ट्रस्ट में पारदर्शिता लाने की कवायद
विशेषज्ञों और सूत्रों का मानना है कि कृष्ण मोहन को यह बड़ी जिम्मेदारी मिलना महज एक संयोग नहीं है। एक पूर्व आईएफएस (IFS) अधिकारी होने के नाते उन्हें फाइलों, प्रशासन और प्रबंधन का लंबा अनुभव है। वहीं, चंदा चोरी मामले में उनकी सख्त भूमिका को देखते हुए उन्हें ट्रस्ट का कामकाज सौंपना यह साफ संदेश देता है कि आने वाले समय में राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी, साफ-सुथरा और व्यवस्थित बनाया जाएगा।
Profile at a Glance: कृष्ण मोहन (Quick Facts)
| विवरण | मुख्य जानकारी |
| नाम | कृष्ण मोहन |
| नया पद/जिम्मेदारी | राम जन्मभूमि ट्रस्ट के प्रशासनिक कार्यों का संचालन (चंपत राय की जगह) |
| पूर्व सेवा | भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी (महाराष्ट्र कैडर) |
| रिटायरमेंट | वर्ष 2012 (रिटायरमेंट के बाद वर्तमान में हरदोई निवासी) |
| शिक्षा | M.Sc. (जियोलॉजी), लखनऊ यूनिवर्सिटी, 1970 |
| संगठनात्मक अनुभव | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अवध क्षेत्र में विभिन्न पद |
| चर्चा का कारण | चंदा चोरी मामले में शिकायतकर्ता, जिसके बाद हुई थी बड़ी कार्रवाई |










