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मौत का दूसरा नाम गुटखा-पान मसाला

( कृष्णा पंडित की कलम से)

आज का युवा वर्ग मौत को दावत देते नजर आ रहे हैं

ज्यादातर शिक्षित युवा भी हैं नशे का शिकार

प्रायः देखा गया है कि जो लोग तम्बाकूयुक्त अपद्रव्यों का सिगरेट का प्रयोग करते हैं उनमें मुख, गले तथा फेफड़ों के रोग अधिकतर पाये जाते हैं ! चूने में घिसकर जर्दा खाने वालों के मसूढ़ों व होठों को जोड़ने वाली त्वचा कट जाती है एवं मसूढ़ों के निरन्तर कटते रहने से उनके दाँत गिर जाते हैं !

जो लोग बार-बार तथा अधिक मात्रा में गुटखे का सेवन करते हैं, वे लोग पाल्मोनरी-टयूबर कुलोसिस रोग से ग्रसित रहते हैं ! गुटखा खाने वाले व्यक्ति के दाँत अपने स्वाभाविक रंग को त्यागकर लाल अथवा पीले हो जाते हैं !

गुटखे व पान मसालों में मिलाये गये छिपकली के पाउडर तथा तेजाब से गालों के भीतर की अति नाजुक त्वचा गल जाती है। ऐसी स्थिति में ऑपरेशन द्वारा गाल को अलग करना पड़ता है। हाल ही में हुई खोजों से तो यहाँ तक पता चला है कि गुटखों तथा पान-मसालों में प्रयोग किया जाने वाला सस्ती क्वालिटी का कत्था मृत पशुओं के रक्त से तैयार किया जाता है। अनेक अनुसंधानों से पता चला है कि हमारे देश में कैन्सर से ग्रस्त रोगियों की संख्या का एक तिहाई भाग तम्बाकू तथा गुटखे आदि का सेवन करने वाले लोगों का है ! गुटखा खाने वाले व्यक्ति की साँसों में अत्यधिक दुर्गन्ध आने लगती है तथा चूने के कारण मसूढ़ों के फूलने से पायरिया तथा दंतक्षय आदि रोग उत्पन्न होते हैं!

नशीली पदार्थों का मिलावट बदस्तूर जारी

तम्बाकू में निकोटिन नाम का एक अति विषैला तत्त्व होता है जो हृदय, नेत्र तथा मस्तिष्क के लिए अत्यन्त घातक होता है ! इसके भयानक दुष्प्रभाव से अचानक आँखों की ज्योति भी चली जाती है! मस्तिष्क में नशे कि प्रभाव के कारण तनाव रहने से रक्तचाप उच्च हो जाता है !

कई घातक बीमारियां इंसान को लेती हैं अपने कब्जे में

व्यसन हमारे जीवन को खोखलाकर हमारे शरीर को बीमारियों का घर बना लेते हैं ! प्रारम्भ में झूठा मजा दिलाने वाले ये मादक पदार्थ व्यक्ति के विवेक को हर लेते हैं तथा बाद में अपना गुलाम बना लेते हैं और अन्त में व्यक्ति को दीन-हीन, क्षीण करके मौत की कगार तक पहुँचा देते हैं !

अब पछताए क्या होत,जब समय जाये बीत

जीवन के उन अंतिम क्षणों में व्यक्ति को पछतावा होता है कि यदि दो साँसें और मिल जाय तो मैं इन व्यसनों की पोल खोलकर रख दूँ किन्तु मौत उसे इतना समय भी नहीं देती !

इसलिए व्यसन हमें अपने मायाजाल में फंसाये, इससे पहले ही हमें जागना होगा तथा अपने इस अनमोल जीवन को परोपकार, सेवा, संयम, साधना तथा एक सुन्दर विश्व के निर्माण में लगाना होगा !

अतः हमें मान-बड़ाई एवं पद प्रतिष्ठा का प्रलोभन छोड़कर ईमानदारी से दैवीकार्य में लगना होगा ! यदि मन के विचार सात्विक और आस्था से लवरेज हो तो इंसान कुरितीयों से दूर रहकर स्वस्थ मानसिकता से जिंदगी का भरपूर आनंद ले सकता है, यह आलेख आज के सभी युवा को पत्रकार कृष्णा पंडित की तरफ से समर्पित है दुसरों को बतायें पढाये और जागरुक कर देश के सच्चे सपूत होने का फर्ज अदा करें तथा सोशल मीडिया पर लाइक और शेयर कर मेरे इस अभियान का हिस्सा बने!!

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