मेरठ/नई दिल्ली:
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सबसे प्रसिद्ध व्यावसायिक केंद्रों में से एक, शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट (Sector-2) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने सेंट्रल मार्केट में नियमों के विपरीत किए गए अवैध निर्माण और सेटबैक अतिक्रमण को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। इस फैसले के तहत 44 सील संपत्तियों पर बने अवैध ढांचे को ध्वस्त किया जाएगा और 815 मकानों के आगे से अतिक्रमण हटाया जाएगा।
जैसे ही मंगलवार दोपहर 3 बजे देश की शीर्ष अदालत का यह निर्णय सामने आया, पिछले 89 दिनों से न्याय की आस में धरना दे रही स्थानीय महिलाएं और व्यापारी फूट-फूटकर रो पड़े। तीन महीने के कड़े आंदोलन, सुंदरकांड पाठ और तमाम जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बाद भी राहत न मिलने से प्रभावित परिवारों में भारी आक्रोश और निराशा है।
💔 ‘ऐसी जिंदगी से अच्छा है हमें मार दो’ – फूट-फूटकर रोईं महिलाएं
अदालत के फैसले के बाद धरना स्थल पर चीख-पुकार मच गई। पिछले 3 महीने से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहीं महिलाएं पूरी तरह टूट गईं।
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शीतल पुजानी (आंदोलनकारी): “सरकार पूरी तरह गूंगी-बहरी हो चुकी है। हम 89 दिनों से सड़कों पर बैठकर गुहार लगा रहे थे, लेकिन किसी ने हमारी सुध नहीं ली। आज हमारी हालत यह हो गई है कि हमें हमारी ही जमापूंजी से बेदखल कर सड़क पर ला खड़ा किया गया है।”
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राधा गुप्ता (स्थानीय निवासी): “लोग कहते हैं कि सरकार विकास कर रही है, लेकिन आज हमारी बर्बादी सबके सामने है। हमारे घर तोड़े जा रहे हैं, व्यापार ठप हो गया है। जब हमारा सब कुछ छीन लिया गया, तो अब हमसे वोट की उम्मीद क्यों की जा रही है? हम वोट क्यों दें?”
प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्होंने जीवनभर की गाढ़ी कमाई इन मकानों और दुकानों में लगा दी थी। इस उम्र में वे दोबारा घर कहां बनाएंगे और अपने बच्चों को लेकर कहां जाएंगे।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ का कड़ा रुख: जानिए क्या है आदेश
यह आदेश न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने लोकेश खुराना द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। व्यापारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने पैरवी की, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि नियमों के उल्लंघन पर कोई समझौता नहीं होगा।
📊 सेंट्रल मार्केट की कार्रवाई का पूरा गणित:
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कुल प्रभावित संपत्तियां: सेंट्रल मार्केट में कुल 860 संपत्तियां हैं, जिनमें से अधिकांश मूल रूप से आवासीय (Residential) थीं, लेकिन नियमों के विरुद्ध उनका व्यावसायिक (Commercial) उपयोग किया जा रहा था।
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44 सील संपत्तियां: इन संपत्तियों पर बने अवैध व्यावसायिक ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त (Demolish) करने का आदेश है।
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815 मकान: इन मकानों के आगे किए गए सेटबैक अतिक्रमण को हटाया जाएगा और इन्हें नियमों के अनुसार इनके मूल आवासीय स्वरूप में लाया जाएगा।
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EWS, LIG और MIG को भी राहत नहीं: छोटे और मध्यम आय वर्ग के मकानों को भी सेटबैक या तकनीकी खामियों के आधार पर कोई छूट नहीं दी गई है। बिना अनुमति के बनी मंजिलों (G+1, G+2, G+3) पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
🚨 अलर्ट पर पूरा मेरठ: सितंबर तक मांगी गई रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सिर्फ सेंट्रल मार्केट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरे मेरठ शहर के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर दिया है।
अदालत ने प्रमुख सचिव (आवास एवं शहरी नियोजन विभाग, उत्तर प्रदेश) को सख्त निर्देश दिए हैं कि मेरठ के अन्य सभी आवासीय क्षेत्रों की गहन जांच की जाए। जहां भी आवासीय भवनों में नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां (जैसे दुकानें, शोरूम या बेसमेंट गोदाम) चल रही हैं, उनकी पहचान कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। उत्तर प्रदेश शासन को यह रिपोर्ट सितंबर में होने वाली अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश करनी होगी।
📌 निष्कर्ष और प्रशासनिक स्थिति
सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम रुख के बाद अब स्थानीय प्रशासन और मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) बड़े स्तर पर ध्वस्तीकरण अभियान की तैयारी में जुट गया है। व्यापारियों और प्रभावित परिवारों का कहना है कि परिवार बढ़ने और आजीविका के लिए उन्होंने जरूरत के अनुसार निर्माण किया था, जिसे अब अवैध घोषित कर दिया गया है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी या स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक राजनीतिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन मेरठ में इस वक्त भारी पुलिस बल की तैनाती और सुरक्षात्मक सतर्कता बढ़ा दी गई है।










