पूर्वांचल राज्य संवाददाता : दीपू तिवारी
सोनभद्र। निराश्रित एवं बेसहारा गोवंश के संरक्षण और बेहतर देखभाल के लिए जिला प्रशासन ने बड़ी पहल की है। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने नई हिंदुआरी में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) फंड से आत्मनिर्भर वृहद गौशाला के निर्माण को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल 1 करोड़ 60 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रशासन ने निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने की तैयारी शुरू कर दी है जिलाधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित गौशाला का उद्देश्य सड़कों और खुले स्थानों पर घूमने वाले निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना, उनका संरक्षण एवं संवर्धन करना तथा पुनर्वास की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। गौशाला को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा, जिससे यहां रखे जाने वाले गोवंश को बेहतर वातावरण और समुचित देखभाल मिल सके परियोजना के तहत गोवंश के सुरक्षित आवास के लिए दो आधुनिक शेड का निर्माण कराया जाएगा। इन शेडों के निर्माण पर 82.88 लाख रुपये की धनराशि खर्च होगी। वहीं वर्षभर चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 12.67 लाख रुपये की लागत से चारा भंडारण कक्ष का निर्माण कराया जाएगा जिलाधिकारी ने बताया कि गौशाला को केवल आश्रय स्थल के रूप में नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर मॉडल के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए परिसर में करीब 15 लाख रुपये की लागत से वर्मी कम्पोस्ट यूनिट स्थापित की जाएगी। गोवंश से प्राप्त गोबर से तैयार जैविक खाद की बिक्री से होने वाली आय का उपयोग गौशाला में चारा, पानी, पशु उपचार और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर किया जाएगा उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर व्यवस्था विकसित होने से गौशाला का संचालन लंबे समय तक आर्थिक रूप से मजबूत रहेगा और गोवंश की बेहतर देखभाल सुनिश्चित हो सकेगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि यह गौशाला जिले में गोवंश संरक्षण के क्षेत्र में एक मॉडल के रूप में विकसित हो गौशाला में गोवंश के लिए स्वच्छ पेयजल, नियमित टीकाकरण, पशु चिकित्सा सुविधा, साफ-सफाई और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। पशु चिकित्सकों और संबंधित विभागों के सहयोग से गोवंश की समुचित देखभाल की जाएगी जिला प्रशासन का कहना है कि इस परियोजना से जहां निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय मिलेगा, वहीं वर्मी कम्पोस्ट के माध्यम से जैविक खाद उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।










