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हाईकोर्ट के फैसले से प्रिंसिपलों की पदोन्नति का रास्ता साफ, 1100 से अधिक स्कूलों को मिल सकते हैं नए प्रिंसिपल

डीटीएफ की मांग—अब और देरी न करे सरकार, लेक्चरार और हेडमास्टर कैडर को तुरंत दी जाए पदोन्नति

अमृतसर, 15 जुलाई – ( राजू वालिया ) – पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा लेक्चरार और हेडमास्टर कैडर से प्रिंसिपल पद पर होने वाली पदोन्नतियों के रास्ते में आई कानूनी बाधाओं को दूर किए जाने के बाद पंजाब के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से रुकी पदोन्नतियों का मार्ग साफ हो गया है। इस फैसले से 1100 से अधिक सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपलों की कमी दूर होने की संभावना बन गई है, जिसे शिक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस संबंध में डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम देव सिंह, महासचिव महेंद्र कौरियांवाली, प्रदेश वित्त सचिव एवं जिला अध्यक्ष अश्वनी अवस्थी तथा जिला महासचिव गुरबिंदर सिंह खैहरा ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि उनकी संगठन लंबे समय से प्रिंसिपलों के बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों का मुद्दा लगातार उठाती रही है। नेताओं ने बताया कि वर्ष 2025 की शुरुआत में डीटीएफ द्वारा जारी एक चर्चित रिपोर्ट में खुलासा किया गया था कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपलों के लगभग 44 प्रतिशत पद खाली हैं। इस रिपोर्ट ने न केवल पंजाब बल्कि देशभर में शिक्षा व्यवस्था की इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया था। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि स्वयं को ‘शिक्षा क्रांति’ की सरकार कहने वाली पंजाब सरकार के कार्यकाल में ये रिक्तियां कम होने के बजाय बढ़कर 55 प्रतिशत से भी अधिक हो गईं, लेकिन सरकार समय रहते कोई प्रभावी कदम नहीं उठा सकी। डीटीएफ नेताओं ने कहा कि शिक्षा विभाग की धीमी कार्यप्रणाली और नीतिगत खामियों के कारण प्रिंसिपलों की पदोन्नति का मामला अदालत में उलझ गया था। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार के समय पदोन्नति प्रक्रिया में सीधी भर्ती से संबंधित शर्तों को शामिल कर दिया गया था तथा प्रिंसिपल के पद 50:50 के अनुपात में सीधी भर्ती और पदोन्नति के माध्यम से भरने के सेवा नियम लागू किए गए थे। बाद में इन नियमों में संशोधन कर 75 प्रतिशत पद पदोन्नति तथा 25 प्रतिशत पद सीधी भर्ती के लिए निर्धारित किए गए। उन्होंने कहा कि इसके बाद टीईटी (TET) की शर्त को भी प्रिंसिपल पदोन्नति से जोड़ दिया गया, जबकि इसका प्रिंसिपल पद से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। इसी आधार पर अदालत द्वारा पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई, जिसके कारण सैकड़ों अधिकारियों की पदोन्नतियां लंबे समय तक अटकी रहीं। अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा इन बाधाओं को शर्तों के अधीन दूर किए जाने के बाद पंजाब के लगभग 1950 सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में प्रिंसिपलों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। डीटीएफ ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सरकारी स्कूलों की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। संगठन के नेताओं जर्मनजीत सिंह छज्जलवाड़ी, चरणजीत सिंह राजधान, हरजाप सिंह बल्ल, राजेश कुमार पराशर, निर्मल सिंह, मनप्रीत सिंह, कुलदीप सिंह वरनाली, मैडम कंवलजीत कौर, सुखजिंदर सिंह जब्बोवाल, विपन रिखी, कंवरजीत सिंह जंडियाला, विशाल कपूर, गुर किरपाल सिंह, शमशेर सिंह और मोनिका सोनी ने पंजाब सरकार से मांग की कि अब किसी प्रकार की और देरी न करते हुए लेक्चरार एवं हेडमास्टर कैडर को उनके निर्धारित कोटे के अनुसार तत्काल प्रिंसिपल पद पर पदोन्नत किया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि सीधी भर्ती के लिए शेष रिक्त पदों का भी तुरंत विज्ञापन जारी कर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि पंजाब के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से चली आ रही प्रिंसिपलों की कमी को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। इस अवसर पर हरविंदर सिंह, अर्चना शर्मा, बिक्रमजीत सिंह भीलोवाल, गुरतेज सिंह, सुखविंदर सिंह बिट्टा, नवतेज सिंह, हरप्रीत सिंह निरंजनपुर तथा पृथीपाल सिंह सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

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