पूर्वांचल राज्य संवाददाता : दीपू तिवारी
सोनभद्र। रेणुकूट वन प्रभाग की पिपरी वन रेंज क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और आयुर्वेदिक परंपरा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष पहल की जा रही है। “एक पेड़ माँ के नाम-3.0 अभियान” के अंतर्गत वृक्षारोपण अभियान–2026 में नवीन विशिष्ट वनों की स्थापना कार्यक्रम के तहत ककोरी वन क्षेत्र में महर्षि चरक औषधि वन विकसित किया जाएगा इस औषधि वन की स्थापना का उद्देश्य औषधीय पौधों का संरक्षण, संवर्धन और लोगों को इनके महत्व के प्रति जागरूक करना है। वन विभाग की इस पहल से क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के साथ आयुर्वेद में उपयोग होने वाली वनस्पतियों को संरक्षित करने में भी मदद मिलेगी लगभग एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में विकसित किए जाने वाले इस औषधि वन में नीम, सीता अशोक, जामुन, अर्जुन, सहजन, हरड़, बहेड़ा, आँवला सहित कई महत्वपूर्ण औषधीय प्रजातियों का रोपण किया जाएगा। इन पौधों का उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में लंबे समय से किया जाता रहा है। साथ ही ये पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, जैव विविधता को बढ़ावा देने और स्वच्छ वातावरण निर्माण में भी सहायक होते हैं वन विभाग के अनुसार, महर्षि चरक औषधि वन के माध्यम से आम लोगों को औषधीय पौधों के गुणों और उनके उपयोग की जानकारी दी जाएगी। इसके लिए पौधों से संबंधित जानकारी वाले सूचना-पट्ट लगाए जाएंगे तथा स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों को जोड़कर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे विभाग का उद्देश्य इस औषधि वन को भविष्य में औषधीय पौधों के संरक्षण और जानकारी के केंद्र के रूप में विकसित करना है। इससे क्षेत्र के लोगों को औषधीय प्रजातियों के महत्व की जानकारी मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी वृक्षारोपण अभियान–2026 के अंतर्गत प्रदेश में विभिन्न प्रकार के विशिष्ट वनों की स्थापना की जा रही है। पिपरी वन रेंज के ककोरी वन क्षेत्र में स्थापित होने वाला महर्षि चरक औषधि वन पर्यावरण संरक्षण, आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार और हरित क्षेत्र विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।









