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चंदौली जिले के धानापुर ग्राम सभा के नरौली और गुरैनी गांवों में पूर्व सांसद फूलन देवी का शहादत दिवस

चंदौली जिले के धानापुर ग्राम सभा के नरौली और गुरैनी गांवों में पूर्व सांसद फूलन देवी का शहादत दिवस मनाया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने उनके जीवन संघर्ष पर प्रकाश डाला और उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी पिछड़ा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र बिंद ने फूलन देवी के जीवन संघर्ष को याद किया। उन्होंने बताया कि फूलन देवी का जन्म 10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के एक गरीब परिवार में हुआ था। बचपन में उन्हें कई कठिनाइयों और शोषण का सामना करना पड़ा।

गुरैनी गांव में कम्युनिस्ट पार्टी माले के नेता श्रवण कुशवाहा ने फूलन देवी के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि फूलन देवी का जीवन गरीबी, बाल विवाह, भयानक अत्याचार, बागी बनकर चंबल के बीहड़ों में उतरने और फिर संसद तक पहुंचने की एक असाधारण और विवादास्पद कहानी है। उनका जन्म जालौन जिले के एक गरीब मल्लाह परिवार में हुआ था। मात्र 11 साल की उम्र में उनकी शादी एक अधिक उम्र के व्यक्ति से कर दी गई थी, जो दुखद रही। कम उम्र में ही उन्हें जातिगत भेदभाव, घरेलू हिंसा और मारपीट का सामना करना पड़ा।

अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें कई कठिनाइयों और पुलिस की प्रताड़ना झेलनी पड़ी। इस प्रताड़ना से तंग आकर वह चंबल के बीहड़ों में डकैतों के गिरोह में शामिल हो गईं। वर्ष 1980 में उन्हें बेहमई गांव में ठाकुर समुदाय के लोगों द्वारा बंधक बनाकर यौन उत्पीड़न किया गया। इस अपमान का बदला लेने के लिए 14 फरवरी 1981 को उन्होंने बेहमई गांव में कई लोगों की हत्या कर दी, जिसके बाद वह देश भर में ‘बैंडिट क्वीन’ के रूप में कुख्यात हो गईं। इसके बाद वह 11 साल तक जेल में रहीं।

जेल से रिहा होने के बाद वह राजनीति में आईं और लोकसभा सांसद चुनी गईं। 25 जुलाई 2001 को दिल्ली में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

इस कार्यक्रम में डॉ. एम.के. बिंद, बाबूलाल बिंद, संजय बिंद, गोरख बिंद, घुरपत बिंद, पांचू गोड़, ध्रुव निषाद, सपा जिलाध्यक्ष सत्यनारायण राजभर, रामजन्म यादव, राजेश यादव, हरिनारायण निषाद, हरिगेन निषाद, सेवा निषाद, कल्लू, श्यामनारायण निषाद, देवेंद्र बिंद, दशमी निषाद, रामप्यारे, हरि ओम मिश्रा, बालजीवन, घनश्याम चौधरी, रामसरन निषाद, मालती देवी, फेंकू निषाद, शकुंतला देवी, मालो देवी, मुन्नी देवी, अस्पताली देवी, मंजू देवी और संजू देवी सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।

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