कृष्णा पंडित की कलम से✍🏻
प्रैंक रील व वीडियो के चक्कर में पहना बुर्का
गुनाह करने वाले अक्सर यह भ्रम पाल लेते हैं कि अंधेरे, रसूख और चालाकी की आड़ में उनका सच कभी सामने नहीं आएगा। लेकिन जब निगाह पैनी हो, इरादे साफ हों तो अपराध की परतें ज्यादा देर तक छिपी नहीं रह सकतीं।
हर अपराध अपने पीछे कोई न कोई निशान जरूर छोड़ता है—कहीं घटनाओं की कड़ी टूटती है, कहीं बयान विरोधाभासी होते हैं, कहीं अचानक बढ़ी संपत्ति सवाल खड़े करती है और कहीं संरक्षण देने वालों की खामोशी बहुत कुछ कह जाती है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि इन संकेतों को पढ़ने वाली नजर ईमानदार हो !
अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून और सजग समाज की पैनी निगाह से बचना आसान नहीं। गुनाह को छिपाने के लिए झूठ की कई परतें चढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन सच की एक किरण उन परतों को चीरने के लिए काफी होती है !
सबसे बड़ा खतरा अपराध से नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से है जो अपराध को देखकर भी आंखें बंद कर ले! जब जिम्मेदार लोग सवालों से बचने लगें और शिकायतों को फाइलों में दबा दिया जाए, तब अपराधियों का हौसला बढ़ता है। इसलिए जरूरी है कि निगाह सिर्फ अपराधी पर नहीं, बल्कि उसके पीछे खड़े संरक्षण तंत्र पर भी हो !
गुनाह चाहे कितना भी सुनियोजित हो, उसकी कोई न कोई कहानी जरूर होती है
वाराणसी के सिगरा थाना अंतर्गत यामाहा बाइक से बुर्का पहने दो लड़के आसाद अंसारी पुत्र नईम निवासी शिवपुर और मिजान अहमद पुत्र मुमताज अहमद निवासी औरंगाबाद पकड़े गए जिसमें पीछे बैठा नकाब पहना हुआ था और चश्मा लगाया था ! दोनों कक्षा 12 के छात्र हैं ! इंटेलिजेंस के अधिकारियों द्वारा पूछताछ में पता चला कि प्रैंक रील व वीडियो के चक्कर में उन्होंने यह भेष धारण किया था उनके परिजनों को बुलाया गया और मॉडिफाई साइलेंसर होने की वजह से दोपहिया वाहन सीज कर दिया गया और समझाने के बाद दोनों को छोड़ दिया गया !









