
सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद शनिवार सुबह प्रशासनिक कार्रवाई में बदल गया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मस्जिद के हिस्से को बुलडोजर से ढहा दिया गया। यह कार्रवाई अदालत के आदेश के बाद की गई है।उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर कई महीनों से चल रहा विवाद शनिवार सुबह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तक पहुंच गया। तड़के करीब चार बजे प्रशासन ने मस्जिद को हटाने की प्रक्रिया शुरू की। मौके पर छह बुलडोजर लगाए गए और भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। शुरुआती कार्रवाई में मस्जिद का एक हिस्सा गिरा दिया गया।मस्जिद पर कार्रवाई की आशंका को लेकर शुक्रवार देर रात से ही सहारनपुर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया था। सोशल मीडिया पर मस्जिद को रात में ही गिराए जाने की खबरें तेजी से फैलने लगीं। इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई।कलेक्ट्रेट के कई गेट बंद कर दिए गए थे। नेताओं और स्थानीय लोगों के परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी गई। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए रैपिड एक्शन फोर्स को भी तैनात किया गया।रात में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने लाइव आकर मामले पर प्रतिक्रिया दी। वहीं, उनके दामाद शायान मसूद ने भी घटनाक्रम की जानकारी साझा की। समाजवादी पार्टी के विधायक आशु मलिक और एमएलसी शाहनवाज खान समेत कई नेता कलेक्ट्रेट पहुंचने की कोशिश करते रहे, लेकिन उन्हें गेट के बाहर रोक दिया गया।देर रात सपा नेताओं की जिलाधिकारी अरविंद चौहान से मुलाकात की भी जानकारी सामने आई। नेताओं ने मस्जिद पर संभावित कार्रवाई को लेकर प्रशासन के सामने अपनी चिंता रखी।बताया गया कि उस समय प्रशासन की ओर से मस्जिद को सील किए जाने की बात कही गई थी और तत्काल ध्वस्तीकरण नहीं किए जाने का भरोसा दिया गया था। हालांकि, कुछ ही घंटों बाद स्थिति बदल गई और शनिवार तड़के प्रशासन ने मस्जिद को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी।मस्जिद के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई के पीछे लंबे समय से चल रहा कानूनी विवाद है। सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को विवादित निर्माण को सरकारी जमीन पर बना अवैध कब्जा मानते हुए बेदखली का आदेश दिया था।आदेश के तहत परिसर खाली करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था। साथ ही करीब 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये की क्षतिपूर्ति निर्धारित की गई थी। मस्जिद पक्ष ने इस जमीन को वक्फ संपत्ति बताते हुए अदालत में अपना पक्ष रखा था। इसके अलावा मस्जिद के करीब 150 साल पुरानी होने का दावा भी किया गया था। हालांकि, अदालत के समक्ष इस दावे के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके।सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ मस्जिद पक्ष ने जिला अदालत का रुख किया था। 20 जुलाई को दाखिल अपील पर सुनवाई के दौरान करीब 17 तारीखें पड़ीं।इसके बाद जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने 2 सितंबर 2026 को मस्जिद पक्ष की अपील खारिज कर दी। अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें विवादित जमीन को सरकारी भूमि माना गया था।इस मामले की शुरुआत मार्च 2025 में हुई थी। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत के बाद कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई।24 मार्च 2025 को उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अध्याशियों की बेदखली) अधिनियम के तहत सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में मामला दाखिल किया गया था। लंबी सुनवाई के बाद जुलाई 2026 में प्रशासनिक अदालत ने मस्जिद को अवैध निर्माण मानते हुए परिसर खाली कराने का आदेश दिया।मामले के तूल पकड़ने के बीच कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन के सहारनपुर पहुंचने की चर्चा भी हुई। हालांकि, उन्हें हाउस अरेस्ट किए जाने का दावा सामने आया। प्रशासन की ओर से कलेक्ट्रेट के आसपास किसी बड़े राजनीतिक या भीड़ के जमावड़े को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई।शनिवार सुबह शुरू हुई कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर को पूरी तरह सुरक्षा घेरे में रखा गया। आम लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित रही और आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए। प्रशासन की ओर से अदालत के आदेश के आधार पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। वहीं, मस्जिद पक्ष की ओर से आगे कानूनी कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है।
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