गोरखपुर के पिपराइच क्षेत्र में शनिवार सुबह स्कूल बस की चपेट में आने से मासूम छात्र हिमांशु की मौत हो गई। बच्चा अपनी मां के साथ स्कूल बस का इंतजार कर रहा था। इसी दौरान बस की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने बस को रोककर प्रदर्शन किया।
गोरखपुर के पिपराइच थाना क्षेत्र के नैया पार बुजुर्ग गांव में हुए इस दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। मृतक हिमांशु एसडी पब्लिक स्कूल में कक्षा एक का छात्र था। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए।
मां के साथ बस का इंतजार कर रहा था हिमांशु
मिली जानकारी के मुताबिक, शनिवार सुबह हिमांशु अपनी मां सोनी के साथ घर के बाहर स्कूल बस का इंतजार कर रहा था। इसी दौरान स्कूल की बस वहां पहुंची। आरोप है कि बस की चपेट में आने से बच्चा पहिए के नीचे आ गया।
हादसा इतना गंभीर था कि हिमांशु को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। मासूम की मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई।
हादसे के बाद ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
बच्चे की मौत के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीणों ने बस का पीछा किया और घटनास्थल से करीब 200 मीटर दूर बस को रोक लिया। इसके बाद चालक मौके से फरार हो गया।
गुस्साए ग्रामीणों ने बस में तोड़फोड़ कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया। करीब तीन घंटे तक चले विरोध के बाद स्थिति शांत हुई।
चालक, शिक्षिका और स्कूल प्रबंधक पर FIR
पुलिस के अनुसार, हिमांशु की मां की शिकायत के आधार पर बस चालक मनोज, शिक्षिका रानी मिश्रा और स्कूल प्रबंधक सुनील चौहान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब हादसे की परिस्थितियों और सभी आरोपों की जांच कर रही है।
स्कूल प्रबंधक ने हादसे को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
स्कूल प्रबंधक सुनील चौहान ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उनका कहना है कि बच्चा अचानक बस की ओर दौड़ गया और चालक उसे देख नहीं पाया। वहीं, पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है ताकि हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सके।
परिवार ने मांगा 1 करोड़ का मुआवजा
हिमांशु की मौत के बाद परिवार और ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग रखी। परिजनों ने परिवार को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। इस संबंध में प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा गया।
स्कूल बसों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर बच्चों की स्कूल बस यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्चों को बस में चढ़ाते और उतारते समय चालक, परिचालक और स्कूल स्टाफ की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे हादसे यह सवाल भी खड़ा करते हैं कि स्कूल बसों के संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया जा रहा है।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि दुर्घटना के समय बस की गति क्या थी और बच्चे के बस की चपेट में आने की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।










