कैराना से सपा सांसद ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- मुस्लिम पक्ष को अपील का पर्याप्त मौका नहीं मिला; हाईकोर्ट ने ₹6.41 करोड़ की वसूली पर लगाई रोक
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर सियासी घमासान जारी है। कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने मामले पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि “मस्जिद वहीं बनेगी” और उन्हें भरोसा है कि मुस्लिम पक्ष अदालत में जीत हासिल करेगा।
इकरा हसन का यह बयान ऐसे समय आया है जब मस्जिद ध्वस्तीकरण के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 11 सितंबर को मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है और मस्जिद प्रबंधन पर लगाए गए ₹6.41 करोड़ के हर्जाने की वसूली पर फिलहाल रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
‘मस्जिद उसी जगह बनेगी’, इकरा हसन का दावा
सपा सांसद इकरा हसन ने सहारनपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मस्जिद विवाद को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम पक्ष अदालत में अपनी बात रखेगा और उन्हें न्याय मिलने का पूरा भरोसा है।
उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि मस्जिद पक्ष को कानूनी प्रक्रिया के तहत पर्याप्त अवसर नहीं मिला। हालांकि, इन आरोपों पर प्रशासन और सरकार का पक्ष अलग है और मामला फिलहाल न्यायिक विचाराधीन है।
5 सितंबर को ध्वस्त की गई थी मस्जिद
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित करीब 315 वर्ग मीटर क्षेत्र की मस्जिद को प्रशासन ने 5 सितंबर को ध्वस्त किया था। इससे पहले सिटी मजिस्ट्रेट ने उत्तर प्रदेश पब्लिक प्रिमाइसेज (एविक्शन ऑफ अनऑथराइज्ड ऑक्यूपेंट्स) एक्ट के तहत परिसर खाली कराने और ढांचे को हटाने का आदेश दिया था।
इस आदेश में मस्जिद प्रबंधन पर कथित अनधिकृत कब्जे और उपयोग के लिए ₹6.41 करोड़ का हर्जाना भी लगाया गया था। मस्जिद प्रबंधन ने इस आदेश के खिलाफ जिला अदालत में अपील की थी, लेकिन 2 सितंबर को जिला जज ने अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद 5 सितंबर को प्रशासन ने कार्रवाई की।
हाईकोर्ट में पहुंचा मामला, सरकार से जवाब तलब
ध्वस्तीकरण के खिलाफ दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब मामले को आगे न्यायिक समीक्षा के लिए स्वीकार किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
साथ ही अदालत ने ₹6.41 करोड़ की हर्जाना राशि की वसूली पर फिलहाल रोक लगा दी है। इसका मतलब यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने मस्जिद के दोबारा निर्माण का आदेश दे दिया है या मामले में अंतिम फैसला मुस्लिम पक्ष के पक्ष में आ गया है। अंतिम निर्णय आगे की सुनवाई और दोनों पक्षों की दलीलों के बाद होगा।
जमीन के मालिकाना हक पर भी विवाद
मामले में सबसे बड़ा विवाद जमीन की स्थिति को लेकर है। याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया है कि जमीन मूल रूप से याकूब खान और वाहिद खान के नाम थी और इसे वक्फ संपत्ति के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से अदालत में इस दावे पर आपत्ति जताई गई। सरकारी पक्ष का कहना है कि रिकॉर्ड में जमीन कचहरी/कलेक्ट्रेट के नाम दर्ज है और वक्फ के तौर पर समर्पण का दस्तावेज रिकॉर्ड पर नहीं रखा गया। यही विवाद अब हाईकोर्ट के सामने भी महत्वपूर्ण मुद्दा है।
पहले भी हाउस अरेस्ट को लेकर सुर्खियों में आई थीं इकरा
मस्जिद पर प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोके जाने की खबर भी सामने आई थी। रिपोर्टों के मुताबिक उन्हें कैराना स्थित आवास पर नजरबंद किया गया था, जिसके बाद उन्होंने प्रशासन पर सवाल उठाए थे।
अब उनके ताजा बयान ने इस विवाद को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
राजनीतिक बयानबाजी तेज, कानूनी लड़ाई जारी
मस्जिद ध्वस्तीकरण के बाद विपक्षी दलों ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासन का पक्ष रहा है कि कार्रवाई न्यायिक आदेशों और सरकारी जमीन से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत की गई।
इकरा हसन का “वहीं मस्जिद बनेगी” वाला बयान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन फिलहाल मस्जिद के पुनर्निर्माण को लेकर कोई अदालत का अंतिम आदेश सामने नहीं आया है।
अब सभी की नजर 12 अक्टूबर को होने वाली हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर है, जहां राज्य सरकार का जवाब सामने आने के बाद मामले की कानूनी दिशा और स्पष्ट हो सकती है।










