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स्नातक एमएलसी चुनाव में पूर्वांचल राज्य का मुद्दा उठाया योगेश मिश्रा बोले—मतदाता प्रत्याशियों की नीति, कार्य और सार्वजनिक रुख देखकर करें निर्णय

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वाराणसी। आगामी स्नातक एमएलसी चुनाव को लेकर पूर्वांचल जनक्रांति मोर्चा ने पूर्वांचल राज्य निर्माण के मुद्दे को चुनावी चर्चा के केंद्र में लाने की अपील की है। मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्ता योगेश कुमार मिश्रा ने स्नातक मतदाताओं से अपील की कि वे मतदान से पहले प्रत्याशियों से पूर्वांचल राज्य निर्माण सहित क्षेत्र के विकास से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर उनकी स्पष्ट स्थिति जानें।

 

मोर्चा की ओर से जारी बयान में कहा गया कि स्नातक मतदाता प्रत्याशियों से यह सवाल पूछें कि वे अलग पूर्वांचल राज्य की मांग को किस रूप में देखते हैं और इस विषय पर उनकी राजनीतिक एवं नीतिगत सोच क्या है। संगठन ने कहा कि प्रत्याशियों के सार्वजनिक बयानों, घोषणापत्र, पूर्व के कार्यों और नीतिगत रुख को भी मतदाता अपने निर्णय का आधार बना सकते हैं।

 

योगेश कुमार मिश्रा ने कहा कि स्नातक मतदाताओं को केवल प्रत्याशी के नाम या राजनीतिक पहचान के आधार पर निर्णय लेने के बजाय रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, स्थानीय उद्योग और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों पर प्रत्याशियों से ठोस जवाब मांगना चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि पूर्वांचल राज्य का प्रश्न केवल नारे तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके अनुसार इस विषय पर संवैधानिक प्रावधानों, प्रशासनिक आवश्यकताओं, क्षेत्रीय विकास, रोजगार, स्थानीय संसाधनों और आर्थिक संभावनाओं के आधार पर सार्वजनिक बहस होनी चाहिए।

 

प्रत्याशियों से पूछे जाने वाले सवाल

 

मोर्चा ने स्नातक मतदाताओं के सामने कई सवाल रखे हैं। इनमें प्रमुख रूप से पूछा गया है कि प्रत्याशी पूर्वांचल राज्य निर्माण के प्रश्न पर क्या रुख रखते हैं और क्या वे इस मुद्दे को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाने की पहल का समर्थन करते हैं।

 

इसके अलावा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, प्राकृतिक एवं आर्थिक संसाधनों के आधार पर स्थानीय उद्योगों का विकास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा का विस्तार, किसानों की आय बढ़ाने के उपाय, कृषि आधारित उद्योग, स्वास्थ्य सुविधाएं, सड़क एवं सिंचाई व्यवस्था तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर प्रत्याशियों की योजनाओं पर भी सवाल उठाने की अपील की गई है।

 

मोर्चा ने यह भी कहा है कि निर्वाचित होने के बाद प्रत्याशी विधान परिषद में पूर्वांचल से जुड़े मुद्दों को किस तरह उठाएंगे, इस संबंध में भी उनसे स्पष्ट रोडमैप पूछा जाना चाहिए।

 

संवैधानिक प्रक्रिया पर भी चर्चा की मांग

 

योगेश मिश्रा ने कहा कि अलग राज्य के गठन का विषय संविधान में निर्धारित प्रक्रिया के तहत आता है। संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद को नए राज्य के गठन तथा राज्यों के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन के संबंध में कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है। उन्होंने कहा कि इसलिए पूर्वांचल राज्य निर्माण की मांग पर राजनीतिक बहस के साथ संवैधानिक प्रक्रिया की जानकारी भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा होनी चाहिए।

 

मोर्चा ने कहा कि जो प्रत्याशी पूर्वांचल राज्य निर्माण के प्रश्न पर अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहते हैं, उन्हें स्नातक मतदाताओं के बीच अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।

 

“जवाब और रिकॉर्ड देखकर करें निर्णय”

 

योगेश कुमार मिश्रा ने कहा कि मतदाताओं को प्रत्याशियों के दावों के साथ-साथ उनके सार्वजनिक रिकॉर्ड और पूर्व के कार्यों की भी जानकारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्याशियों से सवाल पूछना और उनके जवाबों की तुलना करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

मोर्चा की अपील है कि स्नातक मतदाता पूर्वांचल के विकास, रोजगार और राज्य निर्माण सहित प्रमुख मुद्दों पर प्रत्याशियों की स्पष्ट स्थिति जानने के बाद ही अपने मताधिकार का प्रयोग करें।

 

मोर्चा के बयान में कहा गया है कि पूर्वांचल राज्य निर्माण संगठन की प्रमुख राजनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है और आगामी स्नातक एमएलसी चुनाव में इस मुद्दे पर सार्वजनिक चर्चा को आवश्यक माना जा रहा है।

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