सपा नहीं उतारेगी तीसरा राज्यसभा उम्मीदवार अखिलेश बोले अब 3 नहीं 403 पर नजर
लखनऊ, 6 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों को लेकर चल रहा सियासी सस्पेंस मंगलवार को खत्म हो गया। समाजवादी पार्टी ने तीसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा। इसके साथ ही राज्यसभा चुनाव में सपा के दो और बीजेपी के आठ उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की तस्वीर लगभग साफ हो गई है। 6 अक्टूबर नामांकन की आखिरी तारीख थी और बीजेपी के सभी आठ उम्मीदवारों ने भी अपना नामांकन दाखिल कर दिया।
अखिलेश यादव ने दिया 403 का संकेत
तीसरे उम्मीदवार को लेकर कई दिनों से चल रही अटकलों के बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर लिखा, “अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, 403 पर है।”
अखिलेश के इस संदेश को राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए संख्या जुटाने की कोशिश से पीछे हटकर फरवरी 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर फोकस बढ़ाने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
क्यों नहीं उतारा तीसरा उम्मीदवार
राज्यसभा चुनाव के गणित ने सपा के सामने मुश्किल चुनौती खड़ी कर दी थी। यूपी की 403 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल 396 विधायक हैं और एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत है।
सपा के पास अपने दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या है, लेकिन तीसरे उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन जुटाना पड़ता। रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस के दो विधायकों के समर्थन के बावजूद तीसरे उम्मीदवार के लिए पर्याप्त प्रथम वरीयता वोट जुटाना आसान नहीं था।
इसके अलावा राज्यसभा चुनाव में खुला मतदान होने के कारण संभावित क्रॉस वोटिंग का जोखिम भी सपा के सामने था। 2027 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले पार्टी के लिए विधायकों को खुलकर दूसरे खेमे में वोट करने की स्थिति में धकेलना राजनीतिक रूप से जोखिम भरा माना गया।
सपा के दो उम्मीदवार कौन
समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए पहले ही दो उम्मीदवार घोषित कर दिए थे। इनमें पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव शामिल हैं, जो राज्यसभा में छठे कार्यकाल की तैयारी कर रहे हैं।
दूसरे उम्मीदवार धनराज परिमल नथवानी हैं। दोनों ने 30 सितंबर को लखनऊ में नामांकन दाखिल किया था।
बीजेपी के आठों उम्मीदवारों ने भरा पर्चा
बीजेपी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की सभी आठ सीटों के लिए उम्मीदवार उतारे हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में सभी आठ प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया।
बीजेपी के उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं।
बीजेपी ने इस बार मौजूदा राज्यसभा सदस्यों में से कई को दोबारा मौका नहीं दिया। इनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा के नाम भी शामिल हैं। पार्टी की नई सूची में सामाजिक और संगठनात्मक समीकरणों पर भी जोर दिखाई देता है।
अब 16 अक्टूबर को क्या होगा
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान 16 अक्टूबर को निर्धारित है। लेकिन सपा के तीसरे उम्मीदवार से पीछे हटने और बीजेपी के आठ उम्मीदवारों के नामांकन के बाद सभी 10 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन की संभावना बन गई है।
यानी फिलहाल राज्यसभा चुनाव में सीधा मुकाबला टल गया है और दोनों प्रमुख दलों का ध्यान अब अगले बड़े राजनीतिक मुकाबले पर है।
2027 की तैयारी पर अखिलेश का फोकस
अखिलेश यादव का 403 सीटों वाला संदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज हो चुकी है। सपा के लिए विधानसभा चुनाव राज्य की सत्ता की लड़ाई है और पार्टी तीसरी राज्यसभा सीट के लिए जोखिम लेने के बजाय अपने संगठन और चुनावी रणनीति पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है।
राजनीतिक तौर पर यह फैसला सपा की रणनीति में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है — राज्यसभा में संख्या बढ़ाने की कोशिश के बजाय अब पार्टी सीधे 403 विधानसभा सीटों के बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ने का संदेश दे रही है।









