पूर्वांचल राज्य संवाददाता: दीपू तिवारी
पिपरी (सोनभद्र) दुद्धी तहसील के पिपरी स्थानीय क्षेत्र के सेंदूर ग्राम पंचायत में नेशनल हाईवे किनारे स्थित ओरिएंट माइक्रो एब्रेसिव्स लिमिटेड नाम की केमिकल फैक्ट्री को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि यह फैक्ट्री करीब 30 वर्षों से संचालित हो रही है, लेकिन यहां सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।
आरोप है कि फैक्ट्री परिसर में न तो उचित बाउंड्रीवाल है और न ही आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली, जिससे आसपास रहने वाले ग्रामीणों और राहगीरों के लिए संभावित खतरा बना हुआ है।
सूत्रों के अनुसार इस इकाई में सल्फ्यूरिक एसिड, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, सोडियम हाइपोक्लोराइट, क्लोरीन गैस, क्लोरीनेटेड पैराफिन वैक्स, कैल्शियम कार्बोनेट और ऑप्टिकल ब्राइटनर जैसे खतरनाक रसायनों का उत्पादन किया जाता है। ऐसे में सुरक्षा और अपशिष्ट प्रबंधन की कमी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील
सोनभद्र–सिंगरौली औद्योगिक क्षेत्र में पहले से ही प्रदूषण को लेकर चिंता बनी हुई है। इस मामले को लेकर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) में भी सुनवाई चल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई औद्योगिक इकाइयां प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पूरी तरह पालन नहीं करतीं।
बताया जा रहा है कि कंपनी को वर्ष 2012 में जारी आईएसओ 9001:2008 गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली का प्रमाणपत्र करीब नौ वर्ष पहले ही समाप्त हो चुका है। ऐसे में बिना अद्यतन प्रमाणन और पर्याप्त सुरक्षा उपायों के फैक्ट्री के संचालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।










