पूर्वांचल राज्य | विशेष रिपोर्ट
वाराणसी शहर के अत्यंत व्यस्त औरंगाबाद–गोदौलिया मार्ग की स्थिति दिनोंदिन गंभीर होती जा रही है। पिछले कई महीनों से सड़क पर गड्ढों, कीचड़ और जलभराव ने इस प्रमुख मार्ग को जर्जर बना दिया है, जिससे आमजन को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सुबह से देर रात तक इस मार्ग से गुजरने वाले स्कूली बच्चे, कामकाजी युवा युवती बुजुर्ग के साथ-साथ काशी मैं बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने के लिए बाहर से आए हुए दर्शनार्थियों भी रोजाना जोखिम उठाकर आवागमन करने को मजबूर हैं। जगह-जगह उखड़ी सड़क, बिखरे पत्थर और सीवर का बहता पानी स्थिति को और खतरनाक बना रहा है। आए दिन राहगीरों के फिसलकर घायल होने की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहीं दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग दुर्घटनाओं का केंद्र बन चुका है।
स्थानीय दुकानदारों और निवासियों का आरोप है कि सड़क की इस दुर्दशा के पीछे नगर निगम और संबंधित पार्षद की लापरवाही है। उनका कहना है कि सड़क की खुदाई के बाद मरम्मत कार्य अधूरा छोड़ दिया गया, साथ ही सीवर और पाइपलाइन से जुड़े कार्य भी समय पर पूरे नहीं किए गए।
क्षेत्रीय लोगों का यह भी कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद केवल औपचारिकता निभाई गई, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गंदगी और दुर्गंध के कारण आसपास का वातावरण दूषित हो रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ते जा रहे हैं।
स्थानीय व्यापारी चंदू सेठ ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि सड़क की बदहाली का सीधा असर उनके व्यवसाय पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि “इस मार्ग पर गंदगी और अव्यवस्था के कारण ग्राहक रुकने तक से कतराते हैं, जिससे दुकान का खर्च और स्टाफ का वेतन निकालना भी मुश्किल हो गया है।”
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में इस तरह की बदहाल स्थिति को लेकर अब आमजन में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही सड़क की मरम्मत, जलनिकासी और साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब संज्ञान लेता है या फिर जनता यूं ही बदहाली झेलने को मजबूर।










