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भगवान गुह्यराज निषाद जयंती की धूम: शराबबंदी की मांग के साथ समाज को एकजुट होने का आह्वान

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महाराजगंज,। जनपद के फरेंदा कस्बे में रविवार को निषाद उत्थान सेवा समिति द्वारा भगवान गुह्यराज निषाद की जयंती उत्साहपूर्ण और धूमधाम से मनाई गई। धानी ढाला स्थित सत्या मैरेज हॉल में आयोजित इस भव्य समारोह में निषाद समाज के सैकड़ों लोग एकत्रित हुए। मुख्य वक्ता जैसराम निषाद ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश सरकार से शराबबंदी लागू करने की कड़ाई से मांग की, इसे पिछड़े समाज के विकास में सबसे बड़ी बाधा बताते हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से भगवान गुह्यराज निषाद के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर की गई। इसके बाद फरेंदा कस्बे की प्रमुख सड़कों पर एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। इस रैली का उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना था, खासकर शिक्षा, एकता और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ। रैली के दौरान प्रतिभागियों ने नारे लगाए और बैनर-स्लोगन के माध्यम से शराबबंदी का संदेश दिया।
मंच पर कई गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने समारोह को और गरिमामय बना दिया। इनमें स्व. परशुराम निषाद की धर्मपत्नी कुसुम निषाद, पूर्व विधायक चौधरी शिवेंद्र सिंह, पूर्व चेयरमैन राजेश जायसवाल, रमेश सैनी और सुरेश सहानी प्रमुख थे। जैसराम निषाद ने सभी अतिथियों का पारंपरिक माल्यार्पण कर गर्मजोशी से स्वागत किया। कार्यक्रम में भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
अपने विस्तृत संबोधन में जैसराम निषाद ने कहा, ‘भगवान गुह्यराज निषाद की जयंती अब देश-विदेश में हर्षोल्लास से मनाई जा रही है। यह हमारे समाज के लिए गौरव का विषय है।’ उन्होंने चिंता जताई कि उत्तर प्रदेश में शराब की खुली बिक्री से न केवल परिवार टूट रहे हैं, बल्कि पिछड़े समाज का आर्थिक और सामाजिक विकास पूरी तरह रुक गया है। ‘बिहार जैसे राज्य शराबबंदी लागू कर सफल सिद्ध हुए हैं, उत्तर प्रदेश को भी यह कदम उठाना चाहिए’, उन्होंने सरकार से मांग की।
समाज को संगठित और शिक्षित बनाने पर जोर देते हुए जैसराम निषाद ने भावुक अपील की, ‘अपने बच्चों की शिक्षा पर पूरा ध्यान दें। एक रोटी कम खाएं, एक कमरा कम बनवाएं, लेकिन शिक्षा के लिए कभी समझौता न करें। यही समाज का वास्तविक उत्थान है।’ उन्होंने युवाओं से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने और सामाजिक जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसमें सभी ने निषाद समाज की एकता का संकल्प लिया।
यह समारोह निषाद समाज के लिए न केवल धार्मिक आयोजन था, बल्कि सामाजिक जागृति का प्रतीक भी साबित हुआ।

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