पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
बलिया। रामगढ़ से सटे गंगापुर हुकुमछपरा गंगा घाट पर आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ की पूर्णाहुति भव्य गंगा महाआरती और विशाल भंडारे के साथ संपन्न हुई। महायज्ञ का ‘परसाद’ ग्रहण करने के लिए पूरा आस्थावानों में गजब का उत्साह रहा। रविवार की देर रात तक भंडारा निर्वाध चला, जिसमें 35 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ महाप्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ कमाया। महर्षि भृगु वैदिक गुरुकुलम के तत्वावधान में आयोजित महायज्ञ एवं यज्ञोपवित संस्कार में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ नियमित गंगा महाआरती से समूचा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया।यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात आयोजित भव्य भंडारे में 35 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिसमें स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भी सहभागिता की।
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मां गंगा की ‘अद्भुत महिमा’ का दिखा नजारा
गुरुकुलम के संस्थापक आचार्य मोहित पाठक ने अपने संबोधन में एक विशेष और विस्मयकारी घटना का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि, पिछले तीन वर्षों से यह अद्भुत संयोग देखने को मिल रहा है कि ठीक भंडारे के दिन मां गंगा के जलस्तर में स्वतः वृद्धि हो जाती है। यह साक्षात ईश्वरीय संकेत और मां गंगा की असीम कृपा है कि वे स्वयं उत्सव की साक्षी बनती हैं। आचार्य ने लोक कल्याणार्थ भगवान श्री लक्ष्मी नारायण से प्रार्थना के साथ ही जन-जन की सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी सहयोगियों, सेवादारों और उपस्थित जनसमुदाय का आभार व्यक्त किया।










