पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज: डिग्री न होने के बावजूद खुद को शिशु रोग विशेषज्ञ बताकर झोलाछाप संजय सिंह करीब 20 वर्षों से क्लिनिक चला रहा था। इलाज के दौरान 11 माह की मासूम की मौत होने पर जांच में उसकी बीएएमएस डिग्री फर्जी पाई गई। उसके पास केवल डी-फार्मा की डिग्री है, फिर भी क्लिनिक बोर्ड पर बीएएमएस लिखकर लोगों को गुमराह करता रहा।
क्षेत्र में शिशु विशेषज्ञ के रूप में अपनी पहचान बनाने से रोजाना बड़ी संख्या में अभिभावक बच्चों को लेकर पहुंचते थे। चौंकाने वाली बात यह है कि यह अवैध क्लिनिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) परतावल से महज 300 मीटर दूर संचालित होता रहा, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को भनक तक नहीं लगी। स्थानीयों का कहना है कि कप्तानगंज रोड स्थित फर्जी क्लिनिक दो दशकों से फल-फूल रहा था, जबकि जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना रहा।
सीएचसी परतावल के अभिलेखों के अनुसार, आरोपी ने 27 नवंबर 2022 को डी-फार्मा प्रशिक्षण शुरू किया और 28 फरवरी 2023 को पूरा किया। इससे पहले भी वह बिना मान्य डिग्री-पंजीकरण के इलाज कर रहा था। सीएचसी अधीक्षक डॉ. अनिल जायसवाल ने बताया कि क्लिनिक का कोई पंजीकरण नहीं है और बीएएमएस डिग्री फर्जी साबित हुई। औषधि निरीक्षक नवीन कुमार ने कहा कि आरोपी के मेडिकल स्टोर का भी पंजीकरण नहीं है।
श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र के नगर पंचायत परतावल वार्ड-15 महंथ अवेधनाथ नगर स्थित क्लिनिक पर अब सन्नाटा छा गया है। पहले मरीजों की भीड़ लगी रहती थी, अब ताला लटक रहा है। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया, पुलिस तलाश में जुटी है। लापरवाही से उपचार को लेकर मुकदमा दर्ज हुआ है, लेकिन स्वास्थ्य व ड्रग विभाग की ओर से अब तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं हुई।
क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि 20 साल तक बिना पंजीकरण-फर्जी डिग्री के क्लिनिक चलता रहा तो जिम्मेदारी किसकी? समय रहते कार्रवाई होती तो शायद मासूम की जान बच जाती।
फर्जी डिग्री से 20 साल तक शिशु रोग विशेषज्ञ बन झोलाछाप ने मासूम की ली जान, स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर सवाल










