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जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा शंकराचार्य जयंती पर दिव्या पूजन अनुष्ठान किया गया

पुर्वांचल राज्य ब्यूरो वाराणसी

श्री काशी सुमेरु पीठ में शंकराचार्य जयंती पर भव्य सहस्त्रार्चन, महाअभिषेक एवं दिव्य संकल्प सम्पन्न

वाराणसी। अस्सी क्षेत्र स्थित डुमरांव बाग कॉलोनी के आदि शंकराचार्य महासंस्थानम् श्री काशी सुमेरु पीठ मठ में जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य में
शंकराचार्य जी की 2533 वे जन्मशती जयंती के पावन अवसर पर भव्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और वैदिक रीति-विधानों के साथ किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 4 बजे हुआ, जिसमें ललिता त्रिपुर सुंदरी सहस्त्रार्चन का विशेष आयोजन किया गया। यह अनुष्ठान पुष्प, अक्षत और कुमकुम के माध्यम से पांच विद्वान ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न कराया गया।
इस अवसर पर मठ परिसर में आध्यात्मिक वातावरण व्याप्त रहा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित होकर अनुष्ठान में सहभागी बने।
मौके पर जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि
आदि शंकराचार्य केवल एक महान संत ही नहीं, बल्कि अद्वैत वेदांत के सर्वोच्च प्रवर्तक थे, जिन्हें भगवान शिव का साक्षात अवतार माना जाता है। उन्होंने अत्यंत कम आयु में संपूर्ण भारत का भ्रमण कर सनातन वैदिक धर्म की पुनर्स्थापना की और समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान की।
वक्ताओं ने बताया कि आदि शंकराचार्य ने मात्र आठ वर्ष की आयु में केरल से यात्रा प्रारंभ कर नर्मदा तट पर गोविंद भागवतपाद से संन्यास ग्रहण किया। इसके पश्चात उन्होंने “अहं ब्रह्मास्मि”, “तत्वमसि”, “प्रज्ञानं ब्रह्म” जैसे महावाक्यों के माध्यम से जीव और ब्रह्म की एकता का संदेश दिया। उनके द्वारा स्थापित अद्वैत दर्शन आज भी मानव जीवन को सत्य और आत्मबोध की ओर प्रेरित करता है।
कार्यक्रम के अंतर्गत पंचामृत से आदि शंकराचार्य की प्रतिमा का भव्य महाअभिषेक किया गया, जो ललिता त्रिपुर सुंदरी के मंत्रों के साथ पूर्ण हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से पूजन-अर्चन कर धर्म लाभ अर्जित किया। पूरे आयोजन में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष संचार देखने को मिला।
विशेष रूप से इस अवसर पर आगामी वर्ष शंकराचार्य जयंती के अवसर पर 511 किलोग्राम के स्फटिक शिवलिंग तथा 111 किलोग्राम के श्री यंत्र की स्थापना का संकल्प भी लिया गया। यह संकल्प कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा, जिसे सुनकर श्रद्धालुओं में उत्साह और आस्था का संचार हुआ।
आयोजन के अंत में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने धर्म, संस्कृति और वैदिक परंपराओं की रक्षा एवं प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया। इस भव्य आयोजन ने काशी की आध्यात्मिक गरिमा को और अधिक ऊंचाई प्रदान की तथा समाज को एकजुट होकर सनातन संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया।
मौके पर महंत श्रवण देव आश्रम, महंत श्रवण दास बागेश्वरानंद तीर्थ, मुनीश आश्रम, रणछोड़ आश्रम,विजयराम दास कोतवा ,प्रभाकर त्रिपाठी आदि लोगों ने शंकराचार्य के व्यक्तित्व कृतित्व पर प्रकाश डाला

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