गन लाइसेंस और सिक्योरिटी देने पर कोर्ट नाराज, पुलिस अधिकारियों को लगाई फटकार
उत्तर प्रदेश में बाहुबलियों, प्रभावशाली नेताओं और आपराधिक मामलों में घिरे लोगों को हथियारों के लाइसेंस और सुरक्षा देने के मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है।
High Court की जस्टिस Vinod Diwakar की बेंच ने Brij Bhushan Sharan Singh, Raghuraj Pratap Singh, Dhananjay Singh समेत 50 से अधिक बाहुबलियों और आपराधिक मामलों में घिरे लोगों की पूरी “क्राइम कुंडली” कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने मांगी जिलेवार और थानावार रिपोर्ट
कोर्ट ने गृह विभाग को निर्देश दिए हैं कि:
- 26 मई तक प्रदेशभर के बाहुबलियों की सूची पेश की जाए
- यह बताया जाए कि किन लोगों को गन लाइसेंस और सरकारी सुरक्षा मिली हुई है
- जोनवार, जिला और थानावार रिपोर्ट दाखिल की जाए
- पुलिस कप्तान और कमिश्नर व्यक्तिगत अंडरटेकिंग देंगे कि कोई तथ्य नहीं छिपाया गया
कोर्ट ने साफ कहा कि अगर जानकारी छिपाई गई, तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
संतकबीरनगर की याचिका से खुला मामला
यह पूरा मामला Sant Kabir Nagar निवासी जयशंकर उर्फ बैरिस्टर द्वारा दाखिल याचिका के बाद सामने आया।
याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रदेश में गन लाइसेंस जारी करने में नियमों की अनदेखी की जा रही है और प्रभावशाली लोगों को विशेष लाभ दिया जा रहा है।
सरकार के हलफनामे ने कोर्ट को चौंकाया
18 मई की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश हलफनामे में कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए:
यूपी में हथियारों के लाइसेंस के आंकड़े:
- कुल शस्त्र लाइसेंस: 10,08,953
- लंबित आवेदन: 23,407
- दो या अधिक आपराधिक मामलों वाले लाइसेंसधारी: 6,062
- एक से अधिक हथियार लाइसेंस वाले परिवार: 20,960
- लंबित अपीलें: 1,738
इन आंकड़ों को देखकर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई।
कोर्ट की तीखी टिप्पणी: “हथियार डर का माहौल बनाते हैं”
जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने कहा:
“हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन शक्ति और सुरक्षा का भ्रम पैदा करता है, लेकिन समाज में भय और असुरक्षा बढ़ाता है।”
कोर्ट ने कहा कि:
- खुलेआम हथियार लहराना सामाजिक सद्भाव बिगाड़ता है
- आत्मरक्षा के नाम पर डराने-धमकाने की संस्कृति नहीं चल सकती
- कानून आधारित समाज में “गन कल्चर” स्वीकार नहीं किया जा सकता
पुलिस अधिकारियों को लगाई फटकार
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि कई पुलिस अधिकारियों ने हलफनामों में प्रभावशाली और राजनीतिक लोगों का पूरा विवरण नहीं दिया।
कोर्ट ने टिप्पणी की:
“अधिकारियों ने महत्वपूर्ण आपराधिक जानकारियां छिपाने की कोशिश की है।”
इसके बाद अदालत ने विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब कर ली।
यूपी की राजनीति और बाहुबल पर फिर बहस
इस आदेश के बाद यूपी में “बाहुबली राजनीति”, गन कल्चर और VIP सिक्योरिटी को लेकर बहस तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- यह आदेश राजनीतिक प्रभाव और पुलिस व्यवस्था पर बड़ा सवाल है
- आने वाले दिनों में कई चर्चित नामों की सुरक्षा और हथियार लाइसेंस की समीक्षा हो सकती है
- कोर्ट की निगरानी में बड़ा प्रशासनिक एक्शन संभव है
बड़ा सवाल
क्या उत्तर प्रदेश में “गन कल्चर” पर अब सच में लगाम लगेगी?
या फिर यह मामला भी सिर्फ रिपोर्टों और फाइलों तक सीमित रह जाएगा?










