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पेट्रोल-डीजल फिर महंगा: चौथी बार बढ़े दाम, जनता पर महंगाई का नया वार -“महंगाई की आग में झुलसी जनता

दिल्ली में पेट्रोल ₹102 के पार, डीजल ₹95 के करीब

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने 25 मई को पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा कर दिया। इसके बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पहुंच गया है। यह मई महीने में चौथी बड़ी बढ़ोतरी है, जिससे आम जनता पर महंगाई का दबाव और बढ़ गया है।


क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी उछाल इसका मुख्य कारण है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान संकट के चलते क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने भी तेल कंपनियों की लागत बढ़ा दी है।


पिछले 10 दिनों में लगभग ₹7.5 तक बढ़े दाम

15 मई से शुरू हुई लगातार बढ़ोतरी के बाद अब तक पेट्रोल और डीजल करीब ₹7.5 प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। इससे ट्रांसपोर्ट, किराया और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ने लगा है।


ऐसे तय होती है पेट्रोल-डीजल की कीमत

भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले पेट्रोल-डीजल की कीमत में कई तरह के टैक्स और खर्च जुड़ते हैं:

कच्चे तेल की बेस प्राइस

अंतरराष्ट्रीय बाजार में खरीदे गए क्रूड की कीमत।

रिफाइनिंग और कंपनियों का खर्च

रिफाइनरी में कच्चे तेल को शुद्ध कर ईंधन बनाने की लागत।

केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी

केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला उत्पाद शुल्क और रोड सेस।

डीलर कमीशन

पेट्रोल पंप संचालकों का निश्चित कमीशन।

राज्य सरकार का VAT

हर राज्य अपने हिसाब से वैट लगाता है, इसलिए अलग-अलग शहरों में दाम अलग होते हैं।


चुनाव से पहले मिली थी राहत

मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर ₹2 प्रति लीटर की कटौती की थी। इसके बाद लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखी गईं। हालांकि अब अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते तेल कंपनियों ने फिर से दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।


तेल कंपनियों को भारी नुकसान

सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को ऊंचे क्रूड प्राइस के कारण भारी नुकसान झेलना पड़ रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनियों को हर महीने करीब ₹30 हजार करोड़ तक का घाटा हो रहा था।


पीएम मोदी की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में नागरिकों से पेट्रोल, डीजल और गैस का संयमित उपयोग करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि भारत के पास तेल के बड़े भंडार नहीं हैं, इसलिए ऊर्जा बचत समय की जरूरत है।


आगे क्या?

अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम और बढ़ सकते हैं। इससे महंगाई और ट्रांसपोर्ट लागत पर बड़ा असर पड़ सकता है।


 

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