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डीजल की मार, सूखी नहरें और टूटती उम्मीदें — आखिर कैसे बचेगी खेती, कैसे भरेगा देश का पेट

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज ( घुघली) पल्टू मिश्रा

खेती पर तिहरा संकट, बेहन से पहले ही किसानों की टूटी कमर

महराजगंज,देश का अन्नदाता इस समय भारी संकट के दौर से गुजर रहा है। एक ओर डीजल और पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतें किसानों की जेब पर बोझ बन चुकी हैं, तो दूसरी ओर सूखी नहरों ने खेती की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। मई माह में धान की बेहन गिराने का समय चल रहा है, लेकिन खेतों तक पानी न पहुंचने और सिंचाई लागत बढ़ने से किसान परेशान और बेबस नजर आ रहा है।
गांवों में किसान खेतों की जुताई तो करा चुके हैं, मगर अब आगे की तैयारी अधर में लटक गई है। डीजल महंगा होने के कारण ट्रैक्टर, पंपिंग सेट और सिंचाई का खर्च दोगुना हो चुका है। किसान बताते हैं कि पहले ही खाद, बीज और मजदूरी के दाम आसमान छू रहे थे, ऊपर से डीजल की बढ़ी कीमतों ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है।
नहरों ने भी तोड़ी उम्मीद
किसानों की सबसे बड़ी उम्मीद नहरों के पानी से थी, लेकिन समय पर नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया। खेत सूखे पड़े हैं और बेहन का कार्य प्रभावित हो रहा है। किसानों का कहना है कि यदि नहरों में समय से पानी पहुंच जाता तो सिंचाई का खर्च कम हो जाता और धान की तैयारी सुचारु रूप से चलती रहती। लेकिन मौजूदा हालात में किसान निजी साधनों से सिंचाई करने को मजबूर है, जिससे लागत और बढ़ रही है।
“ खेती रुकी तो भूख से कैसे बचेगा देश?”
ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अब खुलकर अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर समय पर धान की बेहन और रोपाई नहीं हो पाई तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। खेती प्रभावित हुई तो आने वाले समय में खाद्यान्न संकट भी खड़ा हो सकता है। किसान सवाल उठा रहे हैं कि जब अन्नदाता ही संकट में होगा तो देश का पेट आखिर कैसे भरेगा?
सरकारी दावे बनाम जमीनी हकीकत
सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के दावे जरूर कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। गांवों में किसान महंगे डीजल, सूखी नहरों और बढ़ती लागत के बीच खुद को असहाय महसूस कर रहा है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो खेती करना मुश्किल हो जाएगा।
किसानों की मांग
किसानों ने सरकार से मांग की है कि तत्काल नहरों में पानी छोड़ा जाए, डीजल पर राहत दी जाए और खेती से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं, ताकि धान की खेती प्रभावित न हो और किसान राहत की सांस ले सके। 

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