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गाजीपुर एनकाउंटर असली या नकली? मंत्री संजय निषाद के गंभीर आरोप, डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने दिए जांच के आदेश!

लखनऊ/गाजीपुर। उत्तर प्रदेश की सियासत में गाजीपुर का कमलेश बिंद एनकाउंटर एक नया सियासी तूफान लेकर आ गया है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने इस एनकाउंटर पर बेहद तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए इसे ‘निषाद-बिंद समाज के साथ भेदभावपूर्ण रवैया’ करार दिया है।

मंत्री के इन तेवरों के बाद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी मोर्चा संभाला है और साफ किया है कि इस पूरे एनकाउंटर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी।

“रासुका लगाना है तो पहले मुझ पर लगाएं” — संजय निषाद का खुला चैलेंज

गाजीपुर पुलिस द्वारा एनकाउंटर के बाद हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर उपद्रवियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA/रासुका) लगाने की चेतावनी दी गई थी। इस पर मंत्री संजय निषाद का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा:

संजय निषाद (कैबिनेट मंत्री): “अगर प्रशासन कार्रवाई करना चाहता है, तो सबसे पहले मुझ पर रासुका लगाकर दिखाए। निषाद-बिंद समाज के साथ यह भेदभावपूर्ण रवैया किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। कुछ अधिकारी जानबूझकर सरकार के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। चुनावी साल में सहयोगी दल के समाज को नाराज करना राजनीतिक रूप से भारी नुकसान पहुंचा सकता है। मैं इसकी शिकायत सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करूंगा।”

विनीत राय हत्याकांड और एनकाउंटर का पूरा गणित

यह पूरा मामला 29 मई की रात का है, जब गाजीपुर में होटल कारोबारी आलोक राय के बेटे विनीत राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। विनीत के पिता ने इलाके के कुख्यात ‘कटरा गैंग’ के सरगना शंकर पांडेय सहित 4 लोगों पर नामजद केस दर्ज कराया था।

पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 3 जून (बुधवार) की रात को 1 लाख रुपये के इनामी बदमाश कमलेश बिंद को एनकाउंटर में ढेर कर दिया। हालांकि, इस मामले के मुख्य आरोपी अब भी फरार हैं, जिन पर इनाम घोषित है:

आरोपी का नाम गैंग में हैसियत इनाम की राशि वर्तमान स्थिति
कमलेश बिंद शूटर / सदस्य ₹ 1 लाख एनकाउंटर में ढेर (3 जून)
शंकर पांडेय सरगना (‘कटरा गैंग’) ₹ 1 लाख फरार
सोनू यादव गैंग सदस्य ₹ 50 हजार फरार
मोनू त्रिपाठी गैंग सदस्य ₹ 50 हजार फरार

मंत्री संजय निषाद का मुख्य आरोप यही है कि मुख्य आरोपी (शंकर पांडेय, सोनू यादव, मोनू त्रिपाठी) अभी भी बचे हुए हैं, जबकि सिर्फ बिंद समाज के आरोपी पर ही इतनी बड़ी कार्रवाई की गई।

एनकाउंटर पर उठे 3 बड़े प्रशासनिक सवाल

संजय निषाद ने गाजीपुर पुलिस और प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं:

  1. अदालत के अधिकारों का हनन: भारतीय न्याय व्यवस्था आरोपी को सरेंडर का मौका देती है, लेकिन पुलिस अब कोर्ट परिसर और गेट से ही लोगों को उठा रही है।

  2. LIU (इंटेलिजेंस) की नाकामी: अगर पुलिस को अंदेशा था कि एनकाउंटर के बाद जनता में आक्रोश भड़केगा, तो स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) ने पहले इनपुट क्यों नहीं दिया?

  3. लापरवाही: एनकाउंटर के बाद शव ले जाने के दौरान पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था न होना प्रशासनिक चूक को दर्शाता है।

“आंखों के सामने पीटा, फिर जंगल ले जाकर मार दिया” — पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल

इस एनकाउंटर के बाद कमलेश बिंद के परिवार में मातम पसरा हुआ है। महज 36 दिन पहले (27 अप्रैल) ही कमलेश की शादी बिहार की रहने वाली मनीषा (नर्सिंग छात्रा) से हुई थी।

मनीषा ने पुलिस पर बेहद संगीन आरोप लगाते हुए कहा, “मेरे पति बिल्कुल निर्दोष थे। पुलिस उन्हें रामपुर से जबरन उठाकर लाई थी। 30 मई को मुझे और मेरी जेठानी को थाने में बिठाकर रखा गया और मेरी आंखों के सामने मेरे पति को बेरहमी से पीटा गया। इसके बाद पुलिस उन्हें जंगल ले गई और एनकाउंटर का नाटक कर मार डाला।”

क्या है ‘कटरा गैंग’ और कैसे करता है काम?

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, विनीत राय हत्याकांड का मुख्य आरोपी शंकर पांडेय क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर है। वह ‘कटरा गैंग’ नाम से एक संगठित आपराधिक गिरोह चलाता है। इस गैंग की कार्यप्रणाली बेहद आधुनिक और खतरनाक है:

  • व्हाट्सएप आधारित नेटवर्क: यह पूरा गैंग एक सीक्रेट व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए ऑपरेट होता है।

  • वारदात का तरीका: जब भी किसी लूट, रंगदारी या अवैध वसूली की घटना को अंजाम देना होता है, तो ग्रुप में मैसेज ड्रॉप किया जाता है। शूटर एक्टिव होते हैं, घटना को अंजाम देते हैं और तुरंत अंडरग्राउंड हो जाते हैं।

डिप्टी सीएम केशव मौर्य का बड़ा बयान — “जांच होगी, दोषी अफसर बख्शे नहीं जाएंगे”

योगी सरकार के भीतर से ही एनकाउंटर पर सवाल उठने के बाद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सरकार का रुख साफ किया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि गाजीपुर एनकाउंटर मामले की पूरी निष्पक्षता से जांच कराई जाएगी। अगर जांच में पुलिस या प्रशासन की तरफ से किसी भी प्रकार की दुर्भावना या लापरवाही सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। 

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