देवरिया (उत्तर प्रदेश)
“मेरे बेटे की मर्चेंट नेवी में 9 महीने पहले ही नौकरी लगी थी। 6 लाख रुपये का कर्ज लेकर उसका समुद्री पासपोर्ट (CDC) बनवाया था। वह घर का इकलौता कमाऊ पूत था… अब भगवान ही जाने हमारा क्या होगा।” यह कहते-कहते देवरिया के रामजी चौरसिया का गला रुंध जाता है और आंखें भर आती हैं।
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सुरौली गांव के रहने वाले शिवानंद चौरसिया (38 वर्ष) की होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास एक तेल टैंकर पर हुए अमेरिकी मिसाइल हमले में दर्दनाक मौत हो गई है। वह सिंगापुर के जहाज ‘MT सेत्तेबेल्लो’ (MT Settebello) पर इंजन फिटर के पद पर तैनात थे। केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनेवाल ने इस दुखद घटना की पुष्टि की है।
💔 कर्ज चुकाने की उम्मीद में रुक गए थे शिवानंद, चीन में उतर जाते तो बच जाती जान
पिता रामजी चौरसिया ने बताया कि बेटा घर का कर्ज जल्द से जल्द उतारना चाहता था, और इसी उम्मीद ने उसकी जान ले ली।
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चीन में मिला था मौका: 23 मई को चीन में तेल खाली करने के बाद साथियों ने शिवानंद को शिप छोड़कर आराम करने की सलाह दी थी। लेकिन ₹45,000 की सैलरी पाने वाले शिवानंद ने कर्ज चुकाने के लिए जहाज पर रुके रहने का फैसला किया।
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ऐसे हुआ हमला: कंपनी के अफसरों के कहने पर एक अन्य खराब खड़े शिप का तेल ‘MT सेत्तेबेल्लो’ में रीलोड किया गया था। बुधवार को जब यह जहाज होर्मुज के पास से गुजर रहा था, तभी अमेरिकी मिसाइल का शिकार हो गया। जहाज पर सवार 24 लोगों में से 3 की मौत हुई, जिनमें शिवानंद भी शामिल थे।
😭 ‘बच्चों को सुलाकर फोन करना…’ पत्नी से हुई थी आखिरी बात
मायके में रहकर बच्चों के साथ छुट्टियां बिता रहीं पत्नी सुनीता को क्या पता था कि मंगलवार शाम को आया फोन उनके पति की आखिरी आवाज़ बन जाएगा।
“उन्होंने मंगलवार शाम को फोन करके बच्चों का हाल पूछा था। बच्चे रो रहे थे तो उन्होंने कहा- ‘बच्चों को सुलाने के बाद फिर बात कर लेना।’ बुधवार को फोन नहीं आया तो देवर ने कहा कि नेटवर्क नहीं होगा। फिर अचानक खबर आई कि उनके जहाज पर बम गिर गया है…”
— सुनीता, मृतक शिवानंद की पत्नी
घर में इस समय मातम पसरा है। शिवानंद का 5 साल का बेटा समर और 2 साल की बेटी वानिका इस बात से बिल्कुल अनजान हैं कि उनके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। मासूम समर रह-रहकर बस एक ही सवाल पूछ रहा है— “पापा कब आएंगे?”
🔍 पीड़ित परिवार की मांगें: “₹1 करोड़ और सरकारी नौकरी मिले”
हादसे की खबर सुनकर शिवानंद के छोटे भाई राम प्रवेश तुरंत दुबई से मुंबई होते हुए गांव सुरौली पहुंचे हैं। परिवार ने भारत सरकार और प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखी हैं:
| मांगें और स्थिति | विवरण |
| शव की वापसी | साले संजय और भाई रामप्रवेश की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द शव को भारत लाए। अभी तक कोई आधिकारिक तारीख नहीं मिली है। |
| प्रशासनिक आश्वासन | एडीएम प्रशासन प्रेम नारायण सिंह ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर ढांढस बंधाया और कहा कि 1-2 दिन में शव गांव पहुंचने की संभावना है। |
| मुआवजा और मदद | छोटे भाई रामप्रवेश ने सरकार से पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता देने की मांग की है। |
🌐 सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
इस अंतरराष्ट्रीय हादसे के बाद सोशल मीडिया पर लोग लगातार केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से ओमान स्थित भारतीय दूतावास के जरिए शव को जल्द से जल्द सम्मानपूर्वक उत्तर प्रदेश लाने की मांग कर रहे हैं।










