डिजिटल डेस्क, प्रयागराज/उन्नाव
“हमारे लिए चूड़ियां लेकर आए थे… अब इन्हें कैसे उतारूं?” यह रुदन उस बदनसीब पत्नी का है, जिसका सुहाग शादी के महज़ दो साल बाद ही उजड़ गया। जब पति की लाश घर पहुंची, तो रोती-बिलखती पत्नी ने आखिरी बार पति के बेजान हाथों (उंगलियों) से अपनी मांग में सिंदूर भरवाया। प्रयागराज के छतनाग घाट पर जब शनिवार को इस भयावह हादसे का शिकार हुए दोस्तों की अर्थियां उठीं, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
दरअसल, शुक्रवार (12 जून) को उन्नाव में गंगा एक्सप्रेस-वे पर एक भीषण सड़क हादसे में प्रयागराज और प्रतापगढ़ के 4 कारोबारी दोस्तों की दर्दनाक मौत हो गई थी। ये चारों दोस्त टाटा पंच कार से शिमला घूमने के लिए निकले थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
💔 क्या है ‘सुहाग उतारने’ की यह मार्मिक परंपरा?
प्रयागराज और आसपास के ग्रामीण अंचलों में सदियों से एक बेहद भावुक धार्मिक परंपरा निभाई जाती है, जिसे आम बोलचाल में ‘सुहाग उतारना’ कहा जाता है।
परंपरा के अनुसार: जब किसी महिला के पति का असमय निधन होता है, तो अंतिम संस्कार से पहले पत्नी को आखिरी बार पति के नाम का सिंदूर लगाया जाता है (या मृतक पति के हाथों से उसकी मांग भरवाई जाती है)। इसे वैवाहिक जीवन के अंतिम प्रतीकात्मक क्षण के रूप में देखा जाता है। इसके बाद महिला की मांग का सिंदूर पोंछ दिया जाता है और हाथों की चूड़ियां उतार दी या तोड़ दी जाती हैं।
अनुपम गुप्ता (32 वर्ष) की पत्नी प्रिया के साथ जब यह रस्म निभाई जा रही थी, तो वहां चीख-पुकार मच गई। अनुपम की बूढ़ी मां भी बेटे के शव से लिपटकर बस एक ही गुहार लगा रही थीं— “मैं तुम्हारे पैर पड़ती हूं, बस एक बार मुझे मेरा बेटा दिखा दो।”
📸 कार के उड़े परखच्चे, कटर से दरवाजे काटकर निकाले गए शव
यह हादसा इतना भीषण था कि देखने वालों की रूह कांप गई। घटनाक्रम के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
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खुशनुमा सफर का दर्दनाक अंत: शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे अनुपम, उदय, विजय और अमन कश्यप कार से शिमला के लिए रवाना हुए थे।
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खड़े ट्रक में घुसी कार: दोपहर करीब 3:30 बजे उन्नाव के पास गंगा एक्सप्रेस-वे पर सड़क किनारे खड़े एक तेज रफ्तार या अनियंत्रित ट्रक में इनकी कार पीछे से जा घुसी।
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दरवाजे काटकर निकाले शव: टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह पिचक गया। चारों दोस्त सीटों से चिपक गए थे और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। पुलिस ने कटर से कार के दरवाजे काटकर शवों को बाहर निकाला।
👥 अपनों को रोता बिलखता छोड़ गए चारों दोस्त
हादसे का शिकार हुए चारों दोस्त अपने-अपने पैरों पर खड़े थे और जाफरपुर बाबूगंज (प्रयागराज) क्षेत्र में अपना कारोबार चलाते थे।
🔥 श्मशान घाट पर पसरा सन्नाटा, एक साथ उठीं अर्थियां
शनिवार को जब पोस्टमार्टम के बाद शव प्रयागराज पहुंचे, तो पूरे इलाके में कोहराम मच गया। सबसे पहले माता-पिता के इकलौते बेटे उदय सिंह की अर्थी निकली, जिसे उनके बेबस पिता राम सिंह ने मुखाग्नि दी। इसके बाद विजय कुमार की चिता को उनके बड़े भाई रोशन लाल ने मुखाग्नि दी। दोपहर में अनुपम के पिता के कोलकाता से लौटने के बाद उनका भी अंतिम संस्कार छतनाग घाट पर कर दिया गया। वहीं, चौथे दोस्त अमन कश्यप का अंतिम संस्कार प्रतापगढ़ स्थित उनके पैतृक गांव में किया गया।
इस दर्दनाक हादसे ने चार हंसते-खेलते परिवारों को ताउम्र का दर्द दे दिया है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना की तस्वीरें और ‘सुहाग उतारने’ का यह मार्मिक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं।










