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गबन के दावों के बीच बोले सेवादार केडी तिवारी- मैं चोर नहीं, दान में मिले गहनों की श्रद्धालुओं को देता था रसीद

डिजिटल डेस्क, अयोध्या

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान के पैसों में कथित तौर पर करोड़ो रुपये के गबन का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। शासन द्वारा गठित 3 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) जहां एक-एक दस्तावेज और बैंक खातों को खंगालने में जुटी है, वहीं इस मामले के मुख्य आरोपी बनाए गए राम मंदिर के सेवादार केडी तिवारी ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया है। केडी तिवारी ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “मैं चोर नहीं हूं। मंदिर में जो भी दान या गहने आते थे, मैं उनकी बकायदा रसीद देता था।”

🛑 ‘बेटों की कमाई से खड़ी की संपत्ति’ – केडी तिवारी की सफाई

राम मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारियों और सेवादारों पर लगे गंभीर आरोपों के बाद, केडी तिवारी और उनके बेटे लवकुश मिश्रा (जो खुद मंदिर में कर्मचारी के रूप में कार्यरत रहे हैं) के ठिकानों पर कथित बरामदगी को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे थे। मीडिया से बातचीत के दौरान भावुक और आक्रोशित होते हुए केडी तिवारी ने अपनी बेगुनाही के पक्ष में ये बातें रखीं:

  • पारदर्शी था पूरा काम: केडी तिवारी का दावा है कि रामलला के दरबार में आने वाले हर एक छोटे-बड़े दान, सोने-चांदी के आभूषणों का पूरा लेखा-जोखा रखा जाता था और श्रद्धालुओं को बकायदा रसीद दी जाती थी।

  • प्रॉपर्टी पर दिया जवाब: उनके और उनके परिवार के पास मिली अकूत संपत्ति और जमीन-जायदाद के आरोपों पर उन्होंने कहा कि यह संपत्ति अवैध नहीं है। उनके बेटों की मेहनत की कमाई और व्यापार से यह प्रॉपर्टी धीरे-धीरे खरीदी गई है, जिसका मंदिर के पैसों से कोई लेना-देना नहीं है।

  • जांच में सहयोग का भरोसा: उन्होंने कहा कि वे किसी भी स्तर की जांच के लिए तैयार हैं क्योंकि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है।

🕵️‍♂️ शासन सख्त: 3 सदस्यीय SIT कर रही है पाई-पाई का हिसाब

राम मंदिर जैसे संवेदनशील और आस्था से जुड़े मामले में गबन की शिकायत मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शासन ने तुरंत कड़ा रुख अख्तियार किया।

मामले की मौजूदा स्थिति: गबन के दावों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के लिए 3 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। एसआईटी की टीम मंदिर ट्रस्ट के बैंक खातों, दान पेटियों के कलेक्शन रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और ऑडिट रिपोर्ट को कब्जे में लेकर जांच कर रही है। शक के दायरे में आए कई कर्मचारियों और उनके करीबियों से पूछताछ का सिलसिला भी जारी है।

📈 क्या है पूरा विवाद और क्यों मचा है हड़कंप?

यह पूरा मामला तब सामने आया जब राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे, रसीदों और जमा धनराशि के मिलान के दौरान करोड़ों रुपये (दावों के मुताबिक लगभग 7 करोड़ रुपये से अधिक) के वित्तीय गबन की बात उजागर हुई।

मुख्य बिंदु विवरण
गबन का दावा राम मंदिर के चढ़ावे और दान में बड़े पैमाने पर हेरफेर के आरोप।
मुख्य किरदार सेवादार केडी तिवारी और उनका बेटा लवकुश मिश्रा (मंदिर कर्मचारी) जांच के घेरे में।
जांच एजेंसी शासन द्वारा गठित 3 सदस्यीय हाई-लेवल SIT।
प्रशासन का रुख जीरो टॉलरेंस नीति के तहत दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश।

करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर से जुड़े इस मामले पर न केवल अयोध्या बल्कि पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। एसआईटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद इस पूरे मामले में कई और बड़े चेहरों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। 

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