Aligarh Soldier Jitendra Sharma Martyr Update: असम में हुए दर्दनाक सैन्य विमान हादसे में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले ने अपना एक और जांबाज बेटा खो दिया है। वायुसेना के विमान हादसे में शहीद हुए लांस नायक जितेंद्र शर्मा का पार्थिव शरीर आज देर शाम तक उनके पैतृक गांव पहुंचने की संभावना है। शहादत की खबर मिलने के बाद से ही पूरे इलाके में शोक की लहर है, लेकिन इस त्रासदी के बीच सबसे ज्यादा झकझोर देने वाली बात वह हिदायत है जो अधिकारियों द्वारा परिवार को दी गई है।
सेना के अधिकारियों ने परिजनों से कहा है— “शव की स्थिति अत्यंत क्षत-विक्षत है, इसलिए मां को बेटे का चेहरा मत दिखाना और न ही ताबूत को खोलना।”
50 घंटे तक छुपाया गया सच, मां को बताया तो चीखों से गूंज उठा आसमान
शहीद जितेंद्र शर्मा का परिवार अलीगढ़ के इगलास इलाके के एक छोटे से गांव का रहने वाला है। जितेंद्र की शहादत के बाद करीब 50 घंटे तक इस कड़वे सच को उनकी बुजुर्ग मां से छुपाकर रखा गया था। परिवार को डर था कि इस उम्र में मां यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी।
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अचानक दी गई जानकारी: जब सोमवार को गांव में सेना की हलचल बढ़ी और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हुईं, तब मां को सच बताया गया।
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मां का रो-रोकर बुरा हाल: जैसे ही मां को पता चला कि उनका लाडला अब इस दुनिया में नहीं है, वह दहाड़े मारकर रो पड़ीं। उनके करुण क्रंदन को देखकर वहां मौजूद हर आंख नम हो गई।
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खेत में होगा अंतिम संस्कार: प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, शहीद के सम्मान में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए घर से करीब 200 मीटर दूर एक खुले खेत में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
असम विमान हादसे में गई जान: देश सेवा में समर्पित था परिवार
लांस नायक जितेंद्र शर्मा भारतीय सेना की उस विंग में तैनात थे जो असम के दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में हवाई रसद और गश्त की जिम्मेदारी संभालती है। कुछ दिनों पहले असम के घने जंगलों वाले इलाके में सेना का एक विमान क्रैश हो गया था, जिसमें जितेंद्र समेत कई जांबाज सवार थे। खराब मौसम और बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण रेस्क्यू टीम को मलबे तक पहुंचने और शवों की शिनाख्त करने में काफी वक्त लगा।
“जितेंद्र सिर्फ हमारा बेटा नहीं था, वह भारत माता का सपूत था। हमें उसकी शहादत पर गर्व है, लेकिन एक मां और पिता के तौर पर इस खालीपन को कभी भरा नहीं जा सकेगा। अंतिम समय में उसका चेहरा न देख पाने का मलाल जिंदगी भर रहेगा।”
— शहीद के एक करीबी परिजन
प्रशासन की तैयारियां: पैतृक गांव में उमड़ा जनसैलाब
शहीद का पार्थिव शरीर विशेष सैन्य वाहन से अलीगढ़ लाया जा रहा है। जिला प्रशासन, पुलिस बल और सेना के जवान गांव में मुस्तैद हैं।
| व्यवस्था का पहलू | वर्तमान स्थिति / तैयारी |
| अंतिम विदाई स्थल | घर से 200 मीटर दूर स्थित पैतृक खेत |
| सम्मान | पूर्ण राजकीय और सैन्य सम्मान (गार्ड ऑफ ऑनर) |
| सुरक्षा व यातायात | गांव की ओर आने वाले रास्तों पर रूट डायवर्जन, भारी पुलिस बल तैनात |
| अतिथि | स्थानीय विधायक, सांसद और प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचने की उम्मीद |
गांव के युवाओं के रोल मॉडल थे जितेंद्र
ग्रामीणों के अनुसार, जितेंद्र जब भी छुट्टी पर गांव आते थे, तो स्थानीय युवाओं को सेना में भर्ती होने और देश सेवा करने के लिए प्रेरित करते थे। वह खुद एक बेहद अनुशासित और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। आज उनकी अंतिम विदाई में न सिर्फ उनके गांव के, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के युवा ‘भारत माता की जय’ और ‘शहीद जितेंद्र अमर रहें’ के नारों के साथ शामिल होने पहुंच रहे हैं।










