डिजिटल डेस्क, अयोध्या
अयोध्या राम मंदिर में दान और चढ़ावे के करोड़ों रुपये के कथित गबन का मामला अब बेहद गंभीर कानूनी मोड़ ले चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद, मंगलवार को अयोध्या के जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के साथ 3 सदस्यीय हाई-लेवल एसआईटी (SIT) की टीम सीधे राम जन्मभूमि परिसर पहुंची। ताजा अपडेट के अनुसार, इस पूरे घोटाले में आज दो अलग-अलग शिकायतों के आधार पर दो बड़ी FIR दर्ज की जा सकती हैं।
🕵️♂️ 42 संदिग्धों से पूछताछ, खातों का ऑडिट शुरू
रामलला के दरबार में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए पैसे और आभूषणों में हेरफेर की शिकायत मिलने के बाद से ही अयोध्या में हड़कंप मचा हुआ है। एसआईटी की जांच की मौजूदा स्थिति इस प्रकार है:
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संदिग्धों पर शिकंजा: सोमवार को जांच टीम ने मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारियों, सेवादारों और सुरक्षाकर्मियों सहित 42 संदिग्ध व्यक्तियों से बंद कमरे में मैराथन पूछताछ की है।
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दस्तावेजों को कब्जे में लिया: एसआईटी ने पिछले कई महीनों के दान-पेटिका कलेक्शन रिकॉर्ड, रसीद बुक्स, कंप्यूटर डेटा और सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में लेकर फॉरेंसिक और तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
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बैंक खातों की स्क्रूटनी: मंदिर से जुड़े मुख्य और सहयोगी बैंक खातों के ऑडिट के लिए वित्तीय विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है ताकि हेरफेर की सटीक रकम का पता लगाया जा सके।
⚖️ किन दो पक्षों की तरफ से दर्ज हो सकती है FIR?
अब तक इस मामले में आंतरिक जांच चल रही थी, लेकिन सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को पुलिस आधिकारिक तौर पर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी में है।
सूत्रों के अनुसार: पहली एफआईआर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की शिकायत पर उन कर्मचारियों के खिलाफ हो सकती है जो सीधे तौर पर दान और रसीद काटने के काम में लगे थे। वहीं, दूसरी एफआईआर सुरक्षा या प्रशासनिक स्तर पर हुई चूक और आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust) को लेकर दर्ज किए जाने की संभावना है।
💬 ‘मैं चोर नहीं हूं’ – मुख्य सेवादार केडी तिवारी ने दी सफाई
इससे पहले, जांच के घेरे में आए मुख्य सेवादार केडी तिवारी और उनके बेटे लवकुश मिश्रा ने मीडिया के सामने आकर अपनी बेगुनाही का दावा किया था।
| पक्ष | सेवादार केडी तिवारी का दावा |
| दान की रसीद | “मंदिर में जो भी सोने-चांदी के गहने या नगदी आती थी, हम बकायदा उसकी रसीद श्रद्धालुओं को देते थे। कोई हेरफेर नहीं हुआ।” |
| संपत्ति पर विवाद | “मेरी जो भी प्रॉपर्टी या जमीनें हैं, वो मेरे बेटों की मेहनत और व्यापार की कमाई से खरीदी गई हैं, मंदिर के पैसे से नहीं।” |
एसआईटी की टीम केडी तिवारी के दावों और उनके बेटों के बैंक खातों व व्यापारिक लेन-देन की भी समानांतर जांच कर रही है।
📈 क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद तब उजागर हुआ जब राम मंदिर ट्रस्ट के आंतरिक ऑडिट में यह बात सामने आई कि रसीदों के जरिए और दान पेटियों से आने वाली भारी-भरकम राशि (दावों के मुताबिक लगभग 7 करोड़ रुपये से अधिक) बैंक खातों में पूरी तरह जमा नहीं की गई। इसके बाद सीधे शासन स्तर से दखल देते हुए वरिष्ठ आईपीएस और प्रशासनिक अधिकारियों की 3 सदस्यीय एसआईटी गठित की गई।
विश्व प्रसिद्ध राम मंदिर से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। आज एफआईआर दर्ज होते ही कई रसूखदार चेहरों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।










