डिजिटल डेस्क, अलीगढ़
“अयोध्या का गौरव लौट चुका है और अब मथुरा-काशी की बारी है। हम मथुरा, काशी और संभल लेकर रहेंगे, इस पर कोई समझौता नहीं होगा।” यह ओजस्वी हुंकार प्रख्यात कथाव्यास और पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने अलीगढ़ की धरती से भरी है। अलीगढ़ में आयोजित एक भव्य धार्मिक कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने न सिर्फ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का संदेश दिया, बल्कि अलीगढ़ का नाम बदलकर ‘हरिगढ़’ करने की पुरज़ोर वकालत भी की।
🏛️ ‘मथुरा, काशी और संभल पर कोई समझौता नहीं’
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन में देश के प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों की मुक्ति का संकल्प दोहराया। उन्होंने सनातनियों को एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा:
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अयोध्या के बाद अगला लक्ष्य: रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हो चुके हैं। अब सनातन समाज की दृष्टि मथुरा (श्रीकृष्ण जन्मभूमि) और काशी (ज्ञानवापी) पर है।
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संभल का भी जिक्र: जगद्गुरु ने संभल के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए साफ कहा कि इन तीनों पवित्र स्थानों को सनातनी समाज लेकर रहेगा और इस विषय पर किसी भी प्रकार के समझौते का सवाल ही नहीं उठता।
🗺️ ‘अलीगढ़ नहीं, इसका नाम हरिगढ़ होना चाहिए’
अलीगढ़ के नाम बदलने की पुरानी मांग को हवा देते हुए जगद्गुरु ने स्थानीय जनता और सरकार के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रखा।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा: “यदि अलीगढ़ की जनता सचमुच स्वयं को रामभक्त मानती है, तो इस शहर का नाम अलीगढ़ से बदलकर ‘हरिगढ़’ किया जाना चाहिए। यह इस पावन भूमि के प्राचीन और वास्तविक गौरव को वापस लौटाने जैसा होगा।”
⚠️ ‘लव और लैंड जिहाद से बचें सनातनी’
कथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने समाज में चल रहे समसामयिक और संवेदनशील मुद्दों पर भी श्रद्धालुओं को सचेत किया। उन्होंने दो मुख्य बिंदुओं पर विशेष ज़ोर दिया:
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लव जिहाद पर चेतावनी: उन्होंने युवाओं, विशेषकर युवतियों और उनके परिवारों से अपील की कि वे सजग रहें और ‘लव जिहाद’ के षड्यंत्रों से अपनी संस्कृति व परिवार की रक्षा करें।
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लैंड जिहाद पर चिंता: धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक जमीनों पर हो रहे जनसांख्यिकीय बदलाव व अवैध कब्जों (लैंड जिहाद) का जिक्र करते हुए उन्होंने सनातनियों को अपनी जमीनों और अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी।
📈 क्यों अहम है जगद्गुरु का यह बयान?
यह बयान ऐसे समय में आया है जब मथुरा और काशी (ज्ञानवापी) के कानूनी विवाद देश की विभिन्न अदालतों में बेहद महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। जगद्गुरु रामभद्राचार्य, जिन्होंने अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण शास्त्रार्थ और गवाही दी थी, उनके मुंह से निकले ये शब्द आने वाले समय में देश की सांस्कृतिक और राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।










