बसपा ने राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन, दलित एवं पिछड़ा वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की उठाई मांग
व्याख्याता भर्ती में आरक्षित वर्गों की उपेक्षा का आरोप, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
अमृतसर, 3 जुलाई (राजू वालिया)। बहुजन समाज पार्टी पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष अवतार सिंह करीमपुरी के निर्देशों पर शुक्रवार को जिला अमृतसर में पंजाब सरकार की कथित दलित एवं पिछड़ा वर्ग विरोधी नीतियों के खिलाफ जिला स्तरीय रोष प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के उपरांत पार्टी नेताओं ने उपायुक्त अमृतसर के माध्यम से पंजाब के राज्यपाल के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर आरक्षण नीति के कथित उल्लंघन का मुद्दा उठाया तथा तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद से अनुसूचित जातियों एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा है। पार्टी का आरोप है कि नीतिगत फैसलों, प्रशासनिक कार्यप्रणाली तथा सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था को कमजोर कर इन वर्गों की संवैधानिक भागीदारी को प्रभावित किया जा रहा है। बसपा नेताओं ने कहा कि इस संबंध में पहले भी कई बार सरकार और प्रशासन का ध्यान तथ्यों सहित आकर्षित किया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पार्टी ने आरोप लगाया कि पंजाब शिक्षा निदेशालय द्वारा पंजाबी, इतिहास, राजनीति शास्त्र, गणित, अर्थशास्त्र, वाणिज्य, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान तथा भूगोल विषयों के लगभग एक हजार व्याख्याताओं की भर्ती के लिए जारी विज्ञापनों में अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए नियमानुसार आरक्षित पदों का उल्लेख नहीं किया गया। बसपा ने इसे संविधान, आरक्षण नीति तथा राज्य में लागू नियमों का खुला उल्लंघन बताया। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि पंजाब देश का वह राज्य है जहां अनुसूचित जातियों की आबादी सबसे अधिक है। ऐसे में इस वर्ग के शिक्षित युवाओं को सरकारी नौकरियों में उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित करना उनके अधिकारों का हनन है और सामाजिक न्याय की भावना के विपरीत है। बसपा ने राज्यपाल से मांग की कि वर्तमान भर्ती विज्ञापनों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए अथवा उन पर रोक लगाई जाए। साथ ही आरक्षण नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए रोस्टर प्वाइंटों की दोबारा गणना करवाई जाए, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग के लिए नियमानुसार आरक्षित पद निर्धारित कर संशोधित भर्ती विज्ञापन जारी किए जाएं तथा इस कथित गैर-संवैधानिक निर्णय के लिए जिम्मेदार राजनीतिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध निर्धारित समय सीमा के भीतर सख्त एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बसपा नेताओं ने राज्यपाल से आग्रह किया कि संविधान के संरक्षक होने के नाते वे इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप करें तथा पंजाब सरकार को संवैधानिक मूल्यों एवं आरक्षण नीति का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करें। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष (शहरी) नत्था सिंह तथा जिला अध्यक्ष (देहाती) सुरजीत सिंह अब्दाल ने संयुक्त रूप से की। कार्यक्रम में मुख्य रूप से बसपा पंजाब के प्रदेश सचिव बलवंत केहरा तथा विशेष रूप से अमृतसर लोकसभा प्रभारी सुरजीत सिंह भैल उपस्थित रहे। कार्यक्रम में रतन सिंह, गुरबख्श सिंह महे, यश बोध, राजेश कौशल, सरदूल सिंह अदलीवाल, केवल सिंह, अश्वनी सरंजन, बलबीर बिट्टू, नवदीप सिंह, घनश्याम दास, रणबीर सिंह राणा, देसराज, कमला प्रसाद, रसपाल सिंह, वस्सण सिंह, दिनेश मट्टू, रजनीश कुमार, जगतार सिंह, मुकेश कुमार, बलदेव सिंह, जसवंत सिंह, लखन, काली, रविंद्र, हरचंद सिंह, बलबीर राज, इंद्रजीत सिंह, विशाल सिंह, सुखदेव सिंह राजोके, मसा सिंह, बलवंत सिंह, जोगा सिंह, बलकार सिंह, जसविंदर सिंह, बूटा सिंह, करण सिंह, हरदीप सिंह, दलजीत सिंह सहित बड़ी संख्या में बसपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।









