अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में रामलला के चढ़ावे की चोरी को लेकर चल रही जांच के बीच एक बहुत बड़ा सियासी और प्रशासनिक भूचाल आ गया है। राम मंदिर ट्रस्ट से छुट्टी होने के बाद पूर्व महासचिव चंपत राय ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ दी है। चंपत राय द्वारा स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को लिखा गया एक बेहद गोपनीय और सनसनीखेज पत्र सामने आया है, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को इस पूरी चोरी का जिम्मेदार ठहराया है।
इस खुलासे के बाद अयोध्या के संतों और राम भक्तों के बीच हड़कंप मच गया है। कभी एक साथ राम मंदिर आंदोलन और ट्रस्ट का काम संभालने वाले पूर्व लेक्चरर (चंपत राय) और डॉक्टर (डॉ. अनिल मिश्रा) अब आमने-सामने आ चुके हैं।
🛑 SIT के सामने चंपत राय का बड़ा दावा: “चढ़ावे की व्यवस्था मेरे पास नहीं थी”
विशेष जांच दल (SIT) को सौंपे अपने आधिकारिक जवाब में चंपत राय ने खुद को इस मामले से पूरी तरह अलग करते हुए ठीकरा डॉ. अनिल मिश्रा के सिर पर फोड़ दिया है। पत्र में मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
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देखरेख की जिम्मेदारी किसकी?: चंपत राय ने साफ कहा है कि राम मंदिर परिसर में आने वाले चढ़ावे, उसकी गिनती और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर डॉ. अनिल मिश्रा की देखरेख में चल रही थी।
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सीसीटीवी फुटेज का हवाला: सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय ने जांच टीम को मंदिर परिसर की सुरक्षा और सीसीटीवी मॉनिटरिंग सिस्टम के उन लूपहोल्स की तरफ इशारा किया है जो अनिल मिश्रा के कार्यक्षेत्र में आते थे।
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वित्तीय लेनदेन से दूरी: उन्होंने दावा किया कि महासचिव होने के नाते वे नीतिगत फैसलों में व्यस्त थे, जबकि रोजाना के चढ़ावे और बैंक डिपॉजिट का काम उनके अधीन नहीं था।
⚖️ ‘लेक्चरर’ और ‘डॉक्टर’ की आपसी रार से ट्रस्ट की साख पर सवाल
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे चंपत राय (जो पेशे से पूर्व लेक्चरर हैं) और अयोध्या के स्थानीय रसूखदार डॉ. अनिल मिश्रा (जो पेशे से होम्योपैथिक डॉक्टर हैं) के बीच की यह तनातनी अब खुलकर सार्वजनिक हो चुकी है।
मामले की पृष्ठभूमि: कुछ दिनों पहले ही मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में विसंगतियों और चोरी की शिकायतें सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्रीय एजेंसियों ने इसका संज्ञान लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों ही बड़े चेहरों की ट्रस्ट से विदाई कर दी गई थी और जांच SIT को सौंप दी गई थी।
🔍 अब आगे क्या?
चंपत राय के इस आक्रामक रुख और सीधे आरोपों के बाद अब गेंद डॉ. अनिल मिश्रा और SIT के पाले में है।
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अनिल मिश्रा का पक्ष: इस गंभीर आरोप के बाद डॉ. अनिल मिश्रा के करीबी सूत्रों का कहना है कि वे भी जल्द ही कानूनी और लिखित तौर पर अपना पक्ष SIT के सामने रखेंगे।
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SIT की अगली कार्रवाई: जांच टीम जल्द ही इन दोनों पूर्व पदाधिकारियों को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ कर सकती है। साथ ही बैंक खातों और मंदिर के काउंटरों के रिकॉर्ड्स को री-वेरिफाई किया जा रहा है।










