पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज ( घुघली) पल्टू मिश्रा
हर योजना के लिए नया नियम, नई प्रक्रिया; खाद संकट और कागजी औपचारिकताओं से जूझ रहा अन्नदाता, जिम्मेदारों से पूछ रहा सवाल।
महराजगंज। खेती-किसानी को देश की रीढ़ कहा जाता है, लेकिन आज वही किसान सरकारी प्रक्रियाओं और कागजी औपचारिकताओं के बोझ तले दबा हुआ दिखाई दे रहा है। किसानों का कहना है कि किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेने या खाद प्राप्त करने के लिए उन्हें बार-बार अलग-अलग प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। पहले पंजीकरण, फिर ई-केवाईसी, एनपीसीआई, फार्मर रजिस्ट्री, पुनः ई-केवाईसी, सत्यापन, आधार संशोधन और कई मामलों में पैन कार्ड जैसी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। इन प्रक्रियाओं में किसानों का समय, धन और श्रम तीनों खर्च हो रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक चक्कर लगाने के बाद भी उनकी समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पाता। कई किसानों का कहना है कि शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद राहत नहीं मिलती और वे लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
इधर खरीफ सीजन के बीच खाद की उपलब्धता भी किसानों के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। किसानों का कहना है कि यूरिया और अन्य उर्वरकों की उपलब्धता तथा निर्धारित मात्रा उनकी खेती की जरूरतों के अनुरूप नहीं है। उनका सवाल है कि यदि समय पर पर्याप्त खाद नहीं मिलेगी तो उत्पादन बढ़ाने के सरकारी दावे कैसे पूरे होंगे?
ग्रामीण क्षेत्रों में यह भी चर्चा है कि विभिन्न कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों में जनप्रतिनिधि और अधिकारी तो पहुंचते हैं, लेकिन किसानों की वास्तविक समस्याओं के समाधान पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा। किसानों का कहना है कि उन्हें घोषणाओं से अधिक जमीनी स्तर पर सरल व्यवस्था और समयबद्ध समाधान की आवश्यकता है।
किसानों की मांग है कि सरकारी योजनाओं की प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए, बार-बार होने वाली औपचारिकताओं को कम किया जाए, खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा शिकायतों का प्रभावी और समयबद्ध निस्तारण किया जाए, ताकि अन्नदाता बिना अनावश्यक परेशानियों के खेती कर सके।










