प्रयागराज | 21 जुलाई
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की पृष्ठभूमि में इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने भ्रष्टाचार और सामाजिक नैतिकता पर बेहद सख्त टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी भारतीय समाज के नैतिक पतन की पराकाष्ठा (Nadir of Indian Integrity) को दर्शाती है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार खत्म करना चाहती है, तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) में संशोधन कर दोषियों के लिए मृत्युदंड जैसे कठोर प्रावधान पर विचार किया जाना चाहिए।
किस मामले में आई यह टिप्पणी?
ये टिप्पणियां न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने ‘बुलडोजर कार्रवाई’ से जुड़े एक मामले में अलग (Split) फैसले के दौरान अपने विस्तृत 51 पन्नों के निर्णय में कीं। फैसले में उन्होंने कहा कि देश में भ्रष्टाचार इतनी गहराई तक सामान्य हो चुका है कि लोग इसे तब तक गलत नहीं मानते, जब तक कोई पकड़ा न जाए।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का किया उल्लेख
न्यायमूर्ति श्रीधरन ने कहा कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी का हालिया विवाद समाज की ईमानदारी पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। उन्होंने टिप्पणी की कि यदि इस प्रकार की घटना भी समाज को झकझोर नहीं पाती, तो यह नैतिक गिरावट की चरम स्थिति है।
भ्रष्टाचार पर कठोर कानून की वकालत
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि यदि सरकार भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने के लिए गंभीर है, तो उसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में संशोधन कर दोषसिद्ध भ्रष्टाचार मामलों में मृत्युदंड जैसे कठोर दंड पर विचार करना चाहिए। यह अदालत का सुझाव है, कोई बाध्यकारी आदेश नहीं।
राम मंदिर चढ़ावा मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में
इस बीच, राम मंदिर चढ़ावा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच की निगरानी अपने हाथ में लेते हुए स्थानीय पुलिस के स्थान पर एक विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को निर्माण शुरू होने से अब तक के चढ़ावे और संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया है।
कानूनी स्थिति
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, हाईकोर्ट की यह टिप्पणी न्यायिक अवलोकन (Judicial Observation) है। भ्रष्टाचार के लिए मृत्युदंड लागू करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। ऐसा कोई प्रावधान लागू करने के लिए संसद द्वारा कानून में संशोधन आवश्यक होगा।









