नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
दिल्ली में “संसद चलो” मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। अदालत ने प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं से जुड़े सभी वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। साथ ही दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
महिला प्रदर्शनकारी के साथ मारपीट का आरोप
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने अदालत को बताया कि उनकी टीम ने प्रदर्शन से जुड़े लगभग 130 वीडियो का अध्ययन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ वीडियो में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के ADCP संदीप लांबा एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। अदालत ने इस आरोप पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया और केवल संबंधित वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।
हाई कोर्ट ने क्या कहा
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि मामले से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए ताकि आगे की सुनवाई में उनका परीक्षण किया जा सके।
याचिकाकर्ताओं के आरोप
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन, गोपाल शंकरनारायण और विकास सिंह ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने जरूरत से अधिक बल प्रयोग किया। याचिका में लाठीचार्ज, आंसू गैस और अन्य बल प्रयोग के आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। ये आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं।
दिल्ली पुलिस का पक्ष
दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत में कहा कि याचिकाएं सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो पर आधारित हैं, जिनकी सत्यता की जांच होना बाकी है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़ने, पथराव और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुईं, जिनके बाद कानून के अनुसार कार्रवाई की गई।
ADCP संदीप लांबा का बयान
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ADCP संदीप लांबा ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया, जिसमें उन्हें भी चोट लगी और धक्का-मुक्की में उनकी वर्दी फट गई।
आगे क्या
हाई कोर्ट ने फिलहाल किसी भी पक्ष के दावों पर अंतिम टिप्पणी नहीं की है। अब सभी की नजरें 11 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर हैं, जहां अदालत रिकॉर्ड और जवाबों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करेगी।










