अकाल तख्त साहिब से गोइंदवाल साहिब तक तीन दिनों तक चला शस्त्र विद्या का प्रदर्शन, जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने दी शाबाशी
अमृतसर, 28 जुलाई – (राजू वालिया) – श्री अकाल तख्त साहिब के आह्वान पर निकाले जा रहे खालसा चेतना मार्च ने पूरे पंजाब में सिख इतिहास, परंपरा और शस्त्र विद्या के प्रति नई जागरूकता पैदा की है। पांच प्यारों की अगुवाई में अमृतसर से तख्त श्री दमदमा साहिब, तलवंडी साबो तक जा रहे इस मार्च में विभिन्न धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। इसी क्रम में गुरमत कॉलेज, गुरु की वडाली की गटका टीम ने 24 से 26 जुलाई तक श्री अकाल तख्त साहिब से गोइंदवाल साहिब तक गुरु साहिब की सवारी के साथ चलते हुए अपने उत्कृष्ट गटका प्रदर्शन से संगतों का दिल जीत लिया। टीम के सदस्यों ने पारंपरिक सिख शस्त्र विद्या के विविध कौशल प्रस्तुत कर युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास से जुड़ने का संदेश दिया। गटका टीम के साथ प्रसिद्ध ढाढी-कविषर ज्ञानी सोहन सिंह सीतल तथा गटका प्रशिक्षक उस्ताद गुरप्रीत सिंह राजा भी उपस्थित रहे। विभिन्न पड़ावों पर संगतों ने टीम का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके प्रदर्शन की सराहना की। इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी को मोबाइल और नशे जैसी बुराइयों से दूर कर अपनी संस्कृति के करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. जसवंत सिंह ने बताया कि गुरु की वडाली स्थित संस्थान पिछले कई वर्षों से ढाढी, कविषर और गटका कला के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए कार्य कर रहा है। यहां से प्रशिक्षित विद्यार्थी देश और विदेश में सिख संस्कृति और गुरमत का प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान में विद्यार्थियों को निःशुल्क प्रशिक्षण, आवास और भोजन की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं में कौम की सेवा, गुरमत प्रचार और सिख परंपराओं को आगे बढ़ाने का जज्बा है, उनके लिए यह संस्थान एक सुनहरा अवसर प्रदान कर रहा है। ਇਸ मार्च के समापन अवसर पर जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने गटका उस्ताद गुरप्रीत सिंह राजा एवं उनकी टीम की पीठ थपथपाते हुए कहा कि सिख शस्त्र विद्या केवल आत्मरक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि यह सिख विरासत और अनुशासन की पहचान भी है। उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में ऐसी गतिविधियों से जुड़ने का आह्वान किया। खालसा चेतना मार्च के दौरान गटका टीम की प्रस्तुति ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि यदि युवाओं को सही दिशा और मंच मिले, तो वे अपनी संस्कृति और विरासत को विश्व पटल पर नई पहचान दिला सकते हैं।










