कृष्णा पंडित की कलम से✍🏻
बाबा विश्वनाथ की असीम कृपा सदैव काशी आए दर्शनार्थी और यहां रह रहे व्यक्ति, जीव जन्तुओं पर बनी रहती है खास इस सावन के महीने में कंधे पर गंगाजल लेकर भगवान शिव पर चढ़ाने की परंपरा, कांवड़ यात्रा कहलाती है ! कांवड़ का मूल शब्द कांवर है जिसका सीधा अर्थ कंधे से है सावन में शिव भक्त अपने कंधे पर पवित्र जल का कलश लेकर पैदल यात्रा करते हुए प्रसिद्ध शिवलिंगों तक पहुंचते हैं ! कांवर ले जाने के पीछे अपना-अपना संकल्प होता है ! कुछ लोग खड़ी कांवर का संकल्प लेकर चलते हैं, वह पूरी यात्रा में जमीन पर कांवर नहीं रखते !
कावड़ के दोनों सिरों पर बंधे कलशों में पवित्र गंगाजल को कंधों पर उठाकर चलना इस बात का प्रतीक है कि भक्त अपने जीवन के सारे बोझ और दुखों को श्रद्धा के साथ महादेव को समर्पित कर रहा है!”शिवो भूत्वा शिवम ययेत”: इसका वास्तविक दर्शन यह है कि भगवान शिव की पूजा करने से पहले भक्त को स्वयं के भीतर शिवत्व (संयम, पवित्रता, और परोपकार) को जगाना होता है !
सावन का महीना और शिव की कृपा
धर्मशास्त्रों के अनुसार जब कांवड़ से जुड़े दोनों पात्र जिन्हें ब्रह्मघट और विष्णुघट कहा जाता है, पवित्र जल से भर लिए जाते है, तो उन्हें एक बांस की डण्डी के सहारे सजा-धजा कर और पूजित कर, स्थापित कर दिया जाता है ! धर्मशास्त्र अनुसार रूद्र अर्थात् शिव बांस में समाहित हैं ! कांवड़िया कांवड़ के माध्यम से साक्षात ब्रह्मा, विष्णु, शिव, तीनों की कृपा एक साथ प्राप्त करते हैं !
सावन में कांवड़ यात्रा अनन्त फलदायी – कांवड़ यात्रा शिव भक्ति का एक रास्ता तो है ही साथ ही व्यक्तिगत विकास में भी सहायक है ! यही वजह है कि श्रावण में लाखों श्रद्धालु कांवड़ में पवित्र जल लेकर एक स्थान से लेकर दूसरे स्थान जाकर शिवलिंगों का जलाभिषेक करते हैं ! ‘कांवड़’ उठाने वाला, कांवड़िया, शिवयोगी के समान रहता है जो मन, वाणी, कर्म से किसी भी प्राणी का अहित नहीं करते, सब में एकमात्र सदाशिव का ही दर्शन करता है !
महादेव को प्रसन्न कर मनोवांछित फल पाने के लिए कई उपायों में एक उपाय कांवर यात्रा है, जिसे शिव को प्रसन्न करने का सहज मार्ग माना गया है! सावन के महीने में भगवान शिव पर जलाभिषेक का विशेष महत्व है !जलाभिषेक से प्रसन्न होकर शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं !भक्त जिह्वा से ‘हर हर महादेव बोल बम’ का जयकारा लगाते हुए कांवड़ उठाकर शिव को जल अर्पित करने के लिए बेताब रहते हैं क्योंकि शिव का अर्थ है कल्याण, अतः भक्त भगवान शिव को जल अर्पित कर न सिर्फ अपना कल्याण बल्कि घर-परिवार के लिए सुख-शांति का आशीर्वाद लेकर आते हैं !!










