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लोकप्रियता के ‘राजा’ उमाशंकर सिंह को आम से लेकर खास ने सिसकते हुए किया सैल्यूट

राजीव शंकर चतुर्वेदी
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
बलिया। लोकप्रिय विधायक उमाशंकर सिंह की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। अंतिम यात्रा के दौरान उनके अनुज रमेश सिंह और पुत्र प्रिंस युकेश सिंह भावुक नजर आए। दोनों की आंखों से लगातार बहते आंसुओं ने उपस्थित लोगों को भी भावुक कर दिया। वहीं, उमड़ी भीड़ उनके परिवार को यह भरोसा दिलाती रही कि पूरे क्षेत्र की जनता उनके साथ खड़ी है। विधायक की अंतिम यात्रा उनके खनवर स्थित आवास से शुरू होकर बछईपुर, सलेमपुर, चोगड़ा, कुकुरहा, हजौली, चिलकहर होते हुए बलिया शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए गंगा घाट स्थित अंतिम संस्कार स्थल पहुंची। पूरे मार्ग में आमजन, समर्थकों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कई स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर दिवंगत विधायक को अंतिम विदाई दी। अंतिम यात्रा के दौरान प्रशासन ने सुरक्षा एवं यातायात की समुचित व्यवस्था की थी। लोगों ने विधायक उमाशंकर सिंह के जनसेवा और सामाजिक कार्यों को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान एवं धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ।

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डीएम व एसपी ने दी श्रद्धांजलि

जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह एवं पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने शुक्रवार सुबह खनवर स्थित विधायक के आवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी। वहीं, खनवर में उपजिलाधिकारी रणधीर सिंह की मौजूदगी में पुलिस जवानों ने राजकीय सम्मान के साथ दिवंगत विधायक को सलामी दी।

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ताउम्र जनता से मजबूत रहा विधायक का रिश्ता

विधायक उमाशंकर सिंह के असामयिक निधन से पूरे बलिया जिला गहरे शोक में नजर आया। रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक रहे, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ नेता उमाशंकर सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लंबी लड़ाई लड़ने के बाद उनका निधन हो गया। यह सिर्फ एक नेता का निधन नहीं, बल्कि उस जनप्रतिनिधि की विदाई थी, जिसने वर्षों तक अपने क्षेत्र की जनता के सुख-दुख में खुद को समर्पित रखा। रसड़ा की गलियों से लेकर बलिया के गांवों तक, उनकी पहचान एक ऐसे जननेता की थी, जो लोगों की बात सुनते थे। उनके बीच रहते थे। उनके मुद्दों को उठाने का प्रयास करते थे। राजनीति में विचार अलग हो सकते हैं, दल अलग हो सकते हैं, लेकिन जब कोई जनप्रतिनिधि इस दुनिया को छोड़कर जाता है, तो उसकी वर्षों की सेवा, संघर्ष और जनता से जुड़ाव हमेशा याद किया जाता है। उमाशंकर सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में जो पहचान बनाई, वह केवल चुनावी जीत तक सीमित नहीं रही, बल्कि जनता के साथ उनके रिश्ते ने उन्हें एक अलग स्थान दिलाया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर हजारों लोग उनके साथ बिताए पलों को याद कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं। बलिया की राजनीति में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा। आने वाली पीढ़ियां उन्हें एक ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में याद करेंगी, जिन्होंने अपने क्षेत्र की जनता के साथ मजबूत रिश्ता कायम रखा।

 

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