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स्कूली बस में ‘ओवरलोडिंग’ का खेल! खड़ी होकर सफर करने को मजबूर मासूम, सुरक्षा मानकों पर बड़ा सवाल

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज ( घुघली) पल्टू मिश्रा
सेंट थॉमस स्कूल घुघली की बस का वीडियो वायरल, क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने का आरोप; दो वर्षीय मासूम की मौत के बाद भी जिम्मेदार बेखबर
महराजगंज। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर घुघली क्षेत्र में व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सेंट थॉमस स्कूल घुघली की एक बस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्कूली वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने के आरोप सामने आए हैं। वायरल वीडियो में बस के अंदर बच्चों की भीड़ दिखाई दे रही है और जगह की कमी के कारण कुछ बच्चियां खड़े होकर सफर करती नजर आ रही हैं। इससे स्कूल वाहन संचालन की व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि हाल ही में घुघली क्षेत्र में स्कूली वैन की चपेट में आने से दो वर्षीय मासूम की दर्दनाक मौत हो चुकी है। इस घटना ने स्कूली वाहनों की फिटनेस, संचालन व्यवस्था, चालक की जिम्मेदारी और बच्चों की सुरक्षा के इंतजामों पर पहले ही सवाल खड़े कर दिए थे। अब बस में क्षमता से अधिक बच्चों के बैठाए जाने का वीडियो सामने आने से इन सवालों को और बल मिला है।
जगह नहीं तो भी बच्चों को ठूंसकर ले जाने का आरोप
अभिभावकों का आरोप है कि कई स्कूली वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर आवागमन कराया जाता है। छोटे वाहनों में भी बच्चों की संख्या अधिक होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में किसी आपात स्थिति या दुर्घटना के दौरान बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है।
वीडियो वायरल, जांच की मांग तेज
सेंट थॉमस स्कूल की बस से संबंधित वायरल वीडियो को लेकर अब जिम्मेदार विभाग से जांच की मांग उठ रही है। अभिभावकों का कहना है कि केवल कागजों में फिटनेस और सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बल्कि सड़क पर संचालित प्रत्येक स्कूली वाहन की वास्तविक स्थिति की जांच होनी चाहिए।
इन मानकों की हो जांच
अभिभावकों ने प्रशासन से घुघली क्षेत्र में संचालित सभी स्कूली बसों और वैन की सघन जांच कराने की मांग की है। वाहनों की निर्धारित क्षमता, फिटनेस प्रमाणपत्र, चालक का लाइसेंस एवं प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण तथा बच्चों की वास्तविक संख्या की जांच कराई जाए। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित वाहन संचालक और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मासूमों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार विभाग कब जागेगा? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है या वायरल वीडियो और हालिया दर्दनाक घटना के बाद स्कूली वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई होगी?
नोट: वायरल वीडियो में दिखाई दे रही स्थिति और लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। स्कूल प्रबंधन अथवा संबंधित विभाग का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए। 

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