वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र प्रताप दुबे और बीएचयू.का पेंटिंग छात्र सम्मानित
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सूरत। 30 मई 1826 को पश्चिम बंगाल से प्रकाशित,पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा संपादित हिंदी का पहला सनाचार पत्र उदंत मार्तंड के 200 साल पूर्ण होने पर सूरत(गुजरात) मे भारत सरकार गृह मंत्रालय राजभाषा विभाग कार्यान्वयन समिति और (बैंक/बीमा)स्टेट बैंक आफ इंडिया द्वारा भव्य कार्यक्रम का आयोजन 20 अगस्त को हुआ।
वीर नर्मद साउथ गुजरात विश्व विद्यालय प्रागंण मे आयोजित कार्यक्रम मे सूरत शहर के प्रमुख अखबारों(हिंदी,गुजराती)के संपादकों का संगम देखा गया ।’ हिंदी -पत्रकारिता -गौरवशाली यात्रा ,वर्तमान चुनौतियां तथा भविष्य ‘ विषय पर आयोजित सेमिनार मे संपादकों ने अपना विचार प्रकट किया। डिजिटल पत्रकारिता के दौर मे पत्रकारिता का मूल स्वरुप और विश्वसनीयता कायम रखने मे प्रिंट पत्रकारिता आज भी विश्वसनीय माध्यम है। टेलिविजन मिडिया द्वारा पहले हम -पहले हम, टीआरपी बढाने दिसम्बर 2025 मे अभिनेता धर्मेन्द्र के निधन की झूठी खबर वायरल हुयी परिणाम टेलीविजन पत्रकारिता की साख कम हो रही है वर्ना 2003 से 2010 तक लोग समाचारों को स्क्रीन पर देखना पसंद करते थे।
चंदौली जनपद के धानापुर निवासी और सूरत प्रवासी पत्रकार वीरेंद्र प्रताप दुबे पिछले 26 वर्षों से पत्रकारिता मे अपना अलग पहचान बनाये हुये हैं जिनका सम्मान गैर हिंदीभाषी राज्य मे किये जाने से पत्रकारों और शुभचिंतकों मे खुशी की लहर है।
वहीं BHU वाराणसी का मूर्तिकला छात्र शीर्ष आचार्य जो बंगाल निवासी हैं दौरान कार्यक्रम पंडित जुगल किशोर शुक्ल की लाईव मूर्ति पेंटिंग बनायी जो सभी के आकर्षण का केंद्र बना उन्हे भी स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया गया।
हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर सूरत मे विशेष संगोष्ठी का आयोजन










