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नेताओं ने राजनीति को अय्यासी का अड्डा और भोग का साधन मान पीढ़ी दर पीढ़ी खुद की भविष्य सुरक्षित किया है…

कृष्णा पंडित की कलम से …✍🏻

भारत के नेता आरक्षण पर संवाद इसलिए नहीं करना चाहते क्योंकि वह अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर चुके हैं और कई पीढ़ी तक सुरक्षित रखना चाहते हैं सामान्य वर्ग के लोगों यही वह वक्त है जब उनकी जनाजा और इनके चेहरों के पीछे छिपी असलियत सबके सामने लाना होगा यह सारे धूर्त और अपराध जगत के सिपाही रहे हैं इनका देश और राष्ट्र प्रेम से कोई मतलब नहीं कोई राष्ट्रगान के बीच में पब्लिक प्लेटफॉर्म पर छोड़कर चला जा रहा है तो कोई दलित प्रेम में इतना पागल हो गया है कि राजनीति में उसको पैदा करने वाले वंशजों के कत्लेआम पर उतर गया है बर्दाश्त की सीमा होती है अब तो आर पार की जंग देखने को ही मिल सकती है ना रहेगी बांस न बजेगी बांसुरी !

कहां गई बांसुरी स्वराज जो एयरपोर्ट पर परमिशन लेकर स्वागत करने गई थी कहां गए स्वाभिमान के वह फूल जो सिर्फ धूल बनकर जमीन पर पड़े हैं जिनको सवर्ण नेता कहते हैं क्या मुंह दिखाओगे आने वाली पीढ़ियों को जब तुमसे यह पूछा जाएगा की जब तुम्हारे बच्चों को जंतर मंतर पर घेर कर पीटा जा रहा था तो तुम्हारे मुंह में छेद नहीं था उनका दोष इतना था कि वह अपनी भविष्य के लिए और वर्तमान को बर्बाद होते नहीं देख सके और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने के लिए दिल्ली के जंतर मंतर पर उतरे !

चार कदम की दूरी पर भारत के सवर्ण नेता शुद्ध हाइजीनिक नाश्ता और रात्रि भोज कर रहे थे वहीं दूसरी तरफ लाखों की संख्या में सामान्य वर्ग का युवा और माता बहने पानी की इंतजार में लाठियां से पीटी जा रही थी..

आज भी यदि खून ना खौला तो समझ लेना तेरी रगो में मिलावटी खून है तू अपनी मद और स्वार्थ से भरी विलासिता जिंदगी में आनंदित होकर गुल खिला रहा है ना तुझे समाज से कोई लेना-देना ना तू समाज का है..

पूर्वांचल में कई दिग्गज सवर्ण नेता जिनके नाम बड़ी सम्मान के साथ लिया जाता रहा लेकिन यह सब धूर्त और दगाबाज हैं तुष्टिकरण की राजनीति के साथ अपने बच्चों की भविष्य और विदेशों में पैसों की बड़ी खेप जमकर तमाशा देख रहे हैं मुझे नहीं लगता कि उनकी जमीर और सच में थोड़ी सी भी हकीकत शामिल है यह नकली लोग हैं इनकी बातें झूठी हैं और चरण चुंबन कर अपनी इमारत में संगमरमर जड़ रहे हैं !

शायद तुम्हें यकीन ना हो लेकिन यह भारत की सरजमी है और रण बांकुरे व शेरों की औलादों की भुजाएं फड़फड़ा रही हैं कहीं गलती से यह दो-दो हाथ करने पर उतर गए तो फिर तुम लोगों को जगह नहीं मिलेगा तुम लोगों ने राजनीति को अपना ठिकाना और जीवन भर अय्यासी का अड्डा बनाकर दूसरे के लिए सिर्फ खानापूर्ति कर गुलामी की जंजीरों में जकड़ी पैमाइश से लोगो के जीवन को नरक बना दिया है!

राजनीति के नमूने और सपोले ने देश में विद्रोह की क्रांति को जन्म दिया है और यह आग बुझाने वाली नहीं, कई लोगों को बुझा कर राख कर देगी !

यदि सचमुच में राजनीति और सामाजिक सेवा करनी होती तो गरीब लाचार जिनको आरक्षण की आवश्यकता है उनको दिया जाना कर्तव्य होना चाहिए था लेकिन यहां तो वोट की राजनीति के लिए सामान्य वर्ग में पैदा होकर भी लोग दलित बन जा रहे हैं और शोषण दमन के साथ खुद को स्थापित कर मरने के पहले तक राजनीतिक लाभ और जीवन का भरपूर आनंद उठा रहे हैं !

आरक्षण हटाओ देश बचाओ
नेताओं की गुलामी से मुक्ति पाओ

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