विघ्नहर्ता के जयघोष से गूंजा चेन्नई, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनी गणेश चतुर्थी
14 सितंबर को शहरभर में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुए विशेष अनुष्ठान, घरों और पंडालों में उमड़ी भक्तों की भीड़
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो चेन्नई।
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में गणेश चतुर्थी, जिसे स्थानीय रूप से विनायक चतुर्थी अथवा पिल्लयार चतुर्थी कहा जाता है, सोमवार को विभिन्न इलाकों में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ धूमधाम से मनाई गई। मंदिरों, सार्वजनिक पंडालों तथा घरों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। पूरे शहर में भक्तिमय वातावरण के बीच मंदिरों और पंडालों में “वेट्ट्री विनयगर” (विजयी गणेश), “स्वामी विनायगरुकु अरोहणा” और “गणपति पिल्लैयार की जय” के उद्घोषों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों के आरंभ का देवता माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि उनकी आराधना से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं तथा सुख, समृद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी आस्था के साथ लोगों ने परिवार, समाज और राष्ट्र की खुशहाली की कामना करते हुए गणपति की पूजा की।
चेन्नई और पूरे तमिलनाडु में यह पर्व सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक माना जाता है। विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों, विशेषकर हिंदू मुन्नानी द्वारा अनेक स्थानों पर भव्य पंडाल स्थापित किए गए, जहां धार्मिक कार्यक्रमों, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक आयोजनों ने उत्सव की भव्यता को और बढ़ाया।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पारंपरिक मिट्टी (कलिमन पिल्लयार) तथा प्राकृतिक सामग्रियों से बनी पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाओं की स्थापना को प्राथमिकता दी। इससे प्रकृति संरक्षण और स्वच्छता का संदेश भी लोगों तक पहुंचा।
पूजा-अर्चना के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा, फल-फूल और दक्षिण भारत के लोकप्रिय पारंपरिक मिष्ठान्न कोझुकट्टई (मोदक) का भोग अर्पित किया गया। नारियल और गुड़ से तैयार यह विशेष प्रसाद श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा।
उत्सव के समापन पर निर्धारित तिथियों में प्रशासन द्वारा तय सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए प्रतिमाओं का विसर्जन चेन्नई के तटीय एवं अन्य निर्धारित जलीय क्षेत्रों में किया जाएगा। गणेश चतुर्थी के अवसर पर पूरे शहर में आस्था, संस्कृति और सामाजिक सौहार्द का अद्भुत संगम देखने को मिला










