महराजगंज। भारतीय रेलवे द्वारा स्टेशनों के आधुनिकीकरण के लिए चलाई जा रही महत्वाकांक्षी ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ आनंद नगर रेलवे स्टेशन पर धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। स्टेशन के सौंदर्यीकरण और कायाकल्प के नाम पर रेलवे प्रशासन द्वारा परिसर के बाहर बने सामुदायिक शौचालय और करीब 18 वर्षों से संचालित 18 दुकानों को तो ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन इसके बदले यात्रियों को कोई वैकल्पिक बुनियादी सुविधा मुहैया नहीं कराई गई। परिणामतः, आज आम यात्रियों को इस भीषण गर्मी में पानी की एक-एक बूंद और छांव के लिए भारी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने अब उजड़े हुए 18 दुकानदारों को वेंडर जोन बनाकर पुनः दुकानें आवंटित करने की मांग तेज कर दी है।भीषण तपिश में पानी और शेड की किल्लत, पसरा सन्नाटास्थानीय लोगों का कहना है कि स्टेशन के आंतरिक हिस्से में तो कुछ सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, परंतु स्टेशन के ठीक बाहर मुख्य निकास द्वार पर बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है। इस रिकॉर्ड तोड़ गर्मी में स्टेशन के बाहर न तो पेयजल (वाटर बूथ) की कोई सुचारू व्यवस्था है और न ही यात्रियों के बैठने के लिए कोई शेड या बेंच बची है। पूर्व में जिन 18 दुकानों की रोशनी और चहल-पहल से पूरा स्टेशन परिसर चौबीसों घंटे जगमगाता रहता था, आज वहां सिर्फ बेतरतीब खड़े खाली टेंपो और धूप में परेशान यात्रियों का हुजूम दिखाई देता है। पास में ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) स्थित होने के बावजूद राहगीरों और मरीजों के परिजनों के लिए बाहर कोई भी सार्वजनिक व्यवस्था नहीं की गई है।महंगाई की दोहरी मार, यात्रियों ने बयां किया दर्दस्टेशन पर आवागमन करने वाले कई प्रमुख यात्रियों ने प्रशासन के इस रवैए पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है:रोहन कुमार (यात्री, नौतनवा): “स्टेशन को चमकाने का क्या औचित्य जब गरीब और मध्यम वर्ग के यात्रियों से उनके हिस्से का सस्ता भोजन ही छीन लिया गया? पहले इन दुकानों पर नाममात्र के दाम में चाय और पौष्टिक नाश्ता मिल जाता था। अब बाहर के अन्य होटल और थड़े वाले मनमाना दाम वसूल रहे हैं, जो हमारी जेब पर भारी पड़ रहा है।”संजू सिंह (यात्री, भागीरथपुर): “हम रेल प्रशासन से मांग करते हैं कि उजाड़े गए उन 18 दुकानदारों के रोजगार को ध्यान में रखते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से जगह आवंटित की जाए। इससे न केवल उन गरीब परिवारों की आजीविका बचेगी, बल्कि यात्रियों को भी सस्ती दरों पर खाद्य सामग्री सुलभ हो सकेगी।”मोहन देवी (निवासी, नई कोर्ट): “ये 18 दुकानें हम जैसे रोजाना यात्रा करने वाले आम लोगों के लिए बहुत बड़ा संबल थीं। इनके अचानक हटाए जाने से अब स्टेशन के बाहर पीने के पानी और सुलभ शौचालय की भयंकर समस्या खड़ी हो गई है। सरकार को इन छोटे दुकानदारों को प्राथमिकता के आधार पर दुकानें वापस लौटानी चाहिए।”जनता की पुरजोर मांग: जल्द बने वेंडर जोनयात्रियों और क्षेत्रीय जनता का स्पष्ट मत है कि आधुनिकीकरण का स्वागत है, लेकिन यह आम जनता की जेब और उनकी प्राथमिक असुविधा की कीमत पर नहीं होना चाहिए। स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग और यात्रियों ने रेल मंत्रालय, पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के उच्च अधिकारियों तथा स्थानीय प्रशासन से संयुक्त रूप से मांग की है कि हटाए गए 18 दुकानदारों को एक व्यवस्थित वेंडर जोन के तहत तत्काल दुकानें वापस दी जाएं, साथ ही स्टेशन के बाहर खोदे गए सामुदायिक शौचालय के स्थान पर नए अत्याधुनिक सुलभ शौचालय और शीतल पेयजल की त्वरित व्यवस्था की जाए।
अमृत भारत योजना के दावों की खुली पोल: आनंद नगर रेलवे स्टेशन पर यात्री बेहाल, उजड़े 18 दुकानदारों को पुनः बसाने की उठी मांग










