महराजगंज।फरेंदा स्थित बाह्य दीवानी न्यायालय परिसर की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने और इसके बुनियादी ढांचे में सुधार लाने के उद्देश्य से शनिवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी ने परिसर का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने न्यायालय परिसर की मौजूदा व्यवस्थाओं, उपलब्ध भूमि और न्यायिक कार्यों के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का विस्तृत जायजा लिया। उनके साथ जिला जज अरविंद मलिक सहित जनपद के तमाम वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी भी उपस्थित रहे।विस्तार के लिए अतिरिक्त भूमि की मांग, सौंपा ज्ञापननिरीक्षण के दौरान सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन, महराजगंज के बैनर तले अधिवक्ताओं ने प्रशासनिक न्यायमूर्ति से मुलाकात कर न्यायालय परिसर के विस्तार की पुरजोर वकालत की। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम कुमार के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने न्यायमूर्ति को एक ज्ञापन सौंपकर परिसर के लिए अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने की मांग की।वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अवगत कराया कि वर्ष 1989 में तत्कालीन गोरखपुर जनपद (वर्तमान महराजगंज) के अंतर्गत इस बाह्य न्यायालय की स्थापना हुई थी। वर्तमान में यहां मात्र 2 से 2.5 एकड़ भूमि ही उपलब्ध है, जो आज के समय और मुकदमों के बढ़ते बोझ के लिहाज से बेहद अपर्याप्त है।मुकदमों का भारी दबाव, अवसंरचना की कमीअधिवक्ताओं ने प्रशासनिक न्यायमूर्ति के समक्ष भौगोलिक और न्यायिक व्यावहारिकताओं को रखते हुए बताया कि इस न्यायालय पर फरेंदा व नौतनवा तहसील के दीवानी वादों के साथ-साथ फरेंदा, बृजमनगंज, पुरंदरपुर और कोल्हुई थाना क्षेत्रों से जुड़े मुकदमों की सुनवाई का भारी दायित्व है।सीमित परिसर होने के कारण नए अदालती भवनों, अधिवक्ताओं के बैठने के चैंबरों, पार्किंग और फरियादियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव बना हुआ है। अधिवक्ताओं का स्पष्ट कहना है कि यदि चिन्हित अतिरिक्त भूमि मिल जाती है, तो आवश्यक भवनों व अभिलेखागारों (रिकॉर्ड रूम) का निर्माण हो सकेगा, जिससे न्यायिक कार्यों में और अधिक तेजी व पारदर्शिता आएगी।10 एकड़ चिन्हित भूमि के क्रय की प्रक्रिया अधर मेंज्ञापन के माध्यम से यह बात भी प्रमुखता से उठाई गई कि पूर्व में न्यायालय के विस्तार हेतु करीब 10 एकड़ भूमि को चिन्हित किया गया था। इस भूमि की किसी भी अन्य प्रकार की खरीद-बिक्री पर प्रशासन द्वारा रोक भी लगा दी गई थी, परंतु लंबा समय बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन द्वारा भूमि क्रय (अधिग्रहण) की प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। अधिवक्ताओं ने न्यायमूर्ति से हस्तक्षेप करते हुए जिला प्रशासन को इस भूमि को शीघ्र क्रय करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।निरीक्षण में ये रहे उपस्थितइस महत्वपूर्ण प्रशासनिक निरीक्षण के दौरान उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी के साथ जिला जज अरविंद मलिक, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) मुकेश यादव, सिविल जज जूनियर डिवीजन विश्वनाथ प्रताप सिंह और अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन अंकित सिंह प्रमुख रूप से मौजूद रहे।वहीं, अधिवक्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाष मोहन श्रीवास्तव, मनोज कुमार मिश्रा, उदय शंकर चौरसिया, आशुतोष यादव, महिमा पाठक, सचिन कुमार, प्रभात, तेज प्रताप यादव, उस्मान, आशुतोष गिरी, बबलू यादव, राकेश, विनय कुमार श्रीवास्तव, हरिनारायण, नरेंद्र कुमार द्विवेदी और गिरधारी जायसवाल सहित भारी संख्या में न्यायिक अधिकारी एवं बार के सदस्य उपस्थित रहे।
फरेंदा बाह्य दीवानी न्यायालय के विस्तार की उठी मांग: प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने किया औचक निरीक्षण









