आंतरिक विवाद और नेताओं के बीच हुई तीखी बहस से नाराज सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एटा और कासगंज की जिला कार्यकारिणियों समेत सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग कर दिया। बैठक में उन्होंने नेताओं को अनुशासन बनाए रखने की कड़ी हिदायत भी दी।
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी ने एटा और कासगंज में संगठन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में हुई बैठक के दौरान नेताओं के बीच हुए विवाद से नाराज सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दोनों जिलों की जिला कार्यकारिणियों समेत सभी इकाइयों को भंग कर दिया।
बैठक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें अखिलेश यादव पार्टी नेताओं पर नाराजगी जताते नजर आ रहे हैं। वीडियो में वह सुबोध और जोगिंदर का नाम लेते हुए पार्टी अनुशासन और नेताओं के व्यवहार को लेकर सख्त टिप्पणी करते सुनाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब पार्टी की बात नहीं मानी जाती और व्यवहार ठीक नहीं रहता तो संगठन को नुकसान होता है। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर कहा, “सब पैसे की गर्मी है।”
बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव ने शनिवार को एटा और कासगंज के पार्टी नेताओं के साथ बैठक की थी। इसमें दोनों जिलों के 250 से ज्यादा वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। बैठक का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन की स्थिति, पिछले चुनावों के प्रदर्शन और आगे की रणनीति पर चर्चा करना था।
इसी दौरान फीडबैक देने को लेकर दो नेताओं के बीच कहासुनी हो गई। जानकारी के मुताबिक, पूर्व विधान परिषद अध्यक्ष रमेश यादव के भतीजे और सपा नेता मंजीत यादव अपनी बात रख रहे थे। इसी बीच एटा जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष जोगिंद्र यादव ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद दोनों के बीच बहस शुरू हो गई।
मामला बढ़ता देख अखिलेश यादव ने दोनों पक्षों को फटकार लगाई। विवाद से नाराज होकर वह बैठक से चले गए। इसके करीब एक घंटे बाद एटा और कासगंज की जिला कार्यकारिणियों के साथ-साथ दोनों जिलों की सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग करने का फैसला लिया गया।










