चंदौली जनपद के धानापुर ब्लाक अंतर्गत अगल-बगल के गांव से लोग पितृ पक्ष में पितरों को पिंडदान व तर्पण करने के लिए बिहार के गया में प्रस्थान कर रहे हैं गया में पितरों के लिए पिंडदान किया जाता है।
इसी क्रम में आज ग्राम सभा महराई के रामेश्वर द्विवेदी ने भी गया के लिए रवाना हुए उन्होंने कहा कि वहा पर तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू परंपरा के अनुसार गया में पिंडदान करना एक बहुत ही पुण्य का कार्य है
मान्यता के अनुसार इससे पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति में सहायता मिलती है।
गया में फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट आदि स्थानों पर पिंडदान की परंपरा है।
सरल शब्दों में:मुख्य स्थानों में शामिल हैं:
विष्णुपद मंदिर फल्गु नदी अक्षयवट गया क्षेत्र के विभिन्न पिंडवेदी स्थल पिंडदान में क्या होता है?
आमतौर पर व्यक्ति अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी तथा अन्य पूर्वजों के नाम से पिंड अर्पित करता है और तर्पण करता है। इसके साथ पूजा-पाठ और संकल्प की प्रक्रिया होती है।कब किया जाता है?
गया में पिंडदान पूरे वर्ष किया जा सकता है। विशेष रूप से पितृपक्ष में यहाँ बड़ी संख्या में लोग पिंडदान के लिए आते हैं। पितृपक्ष की तिथियाँ हर वर्ष हिंदू पंचांग के अनुसार बदलती हैं।
ग्रामीण रामेश्वर द्विवेदी प्रमोद दुबे कामेश्वर दुबे कौशांबी दुबे रागिनी दुबे अन्नपूर्णा दुबे जय आनंद कुमार दुबे सनी त्रिपाठी नवनीत तिवारी राम जी ज्वाला सतीश रिंकू आदि लोगों के अनुसार पितृ पक्ष में लोग सादगी से जीवन व्यतीत करते हैं और अपने पितरों को याद करते हैं
अपने पितरों का तर्पण करने के लिए गया के लिए प्रस्थान किया पूरे गांव के लोग मिलकर उनको गया गजाधर के लिए रवाना किया
धानापुर महराई के रामेश्वर द्विवेदी पितरों को तर्पण करने गया रवाना










