*स्कूल शिक्षा के साथ स्किल्स: बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी*
*संजीव शर्मा*
*चेयरमैन, गुरुकुलम ग्लोबल स्कूल*
*जैसा चलोगे, वैसा बनोगे—यह पुरानी कहावत आज भी सत्य है। आज के तेजी से बदलते दौर में, पारंपरिक स्कूल शिक्षा अकेले पर्याप्त नहीं रही। किताबी ज्ञान तो आधार है, लेकिन व्यावहारिक स्किल्स ही बच्चों को वास्तविक जीवन की चुनौतियों से जूझने की ताकत देते हैं, उन्हें **अलग पहचान* दिलाते हैं। गुरुकुलम ग्लोबल स्कूल में हम मानते हैं कि शिक्षा का असली मकसद बच्चों को नौकरी के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और सृजनशील व्यक्तित्व बनाना है। आइए, समझते हैं कि स्किल्स की शिक्षा क्यों जरूरी है और माता-पिता को इसे कैसे समझाया जाए।
स्कूल शिक्षा हमें पढ़ना-लिखना, गणित और विज्ञान सिखाती है, लेकिन स्किल्स जैसे डिजिटल टूल्स का उपयोग, टीमवर्क, समस्या समाधान, संचार कला या उद्यमिता हमें दुनिया में *सोने में सुहागा* साबित करती हैं। उदाहरण के लिए, कोविड महामारी ने दिखाया कि डिजिटल स्किल्स वाले बच्चे घर बैठे सीख सकते थे, जबकि बिना स्किल्स के बच्चे पिछड़ गए। आज की नौकरियां 70% स्किल-आधारित हैं, जहां आईआईटी या आईआईएम जैसे डिग्री धारक भी बिना व्यावहारिक स्किल्स के संघर्ष करते हैं। विश्व स्तर पर देखें तो चीन इसका जीता-जागता उदाहरण है। 2000 से चीन ने स्कूलों में व्यावसायिक स्किल ट्रेनिंग को अनिवार्य किया, जिससे उनकी जीडीपी 10 गुना बढ़कर 2024 में 18 ट्रिलियन डॉलर हो गई। वहां 80% युवा स्किल्स से रोजगार पा रहे हैं, जो उनकी आर्थिक शक्ति का आधार बने। गुरुकुलम ग्लोबल स्कूल में हम एनएसक्यूएफ के तहत कोडिंग, रोबोटिक्स, पब्लिक स्पीकिंग और फाइनेंशियल लिटरेसी जैसी स्किल्स को पाठ्यक्रम में शामिल कर रहे हैं।
माता-पिता को यह समझाने का सबसे अच्छा तरीका है संवाद और उदाहरणों का सहारा लेना। स्कूल के न्यूजलेटर, पीटीएम और वर्कशॉप्स के माध्यम से हम कह सकते हैं: *”किताबी कीड़ा बने या लाइफ-रेडी सुपरस्टार?”* वास्तविक सफलता की कहानियां साझा करें—जैसे, एक छात्र जो स्कूल में सीखी कोडिंग से ऐप बनाकर अपना स्टार्टअप चला रहा है। घर पर भी माता-पिता को प्रोत्साहित करें कि बच्चे को कुकिंग, गार्डनिंग या बजट बनाना सिखाएं। हम स्कूल में ‘स्किल डे’ आयोजित करते हैं, जहां बच्चे माता-पिता के सामने अपनी स्किल्स दिखाते हैं, जिससे माता-पिता खुद अनुभव करते हैं कि *”कुशल भुजा ही धन है”*।
स्किल्स की शिक्षा से बच्चे आत्मविश्वास से भरे होते हैं, बेरोजगारी का डर कम होता है और वे समाज के लिए योगदान देते हैं। माता-पिता से अपील है—स्कूल शिक्षा को पूरक बनाएं, स्किल्स को मुख्य धारा में लाएं। गुरुकुलम ग्लोबल स्कूल आपके बच्चे के होलिस्टिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है। आइए, मिलकर नई पीढ़ी को स्किल्ड इंडिया का सशक्त कंधा बनाएं।








